पहले गर्भवती महिला से कथित मारपीट, अब थाने पर बवाल! किरनापुर में क्यों भड़का आक्रोश?
Alleged Assault on Pregnant Woman, Now Chaos at Police Station! Why Did Anger Erupt in Kirnapur?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले के किरनापुर में गर्भवती महिला और उसके पति के साथ कथित पुलिस मारपीट के मामले ने बुधवार को उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब मरार माली समाज के हजारों लोगों ने रैली निकालकर किरनापुर थाने का घेराव कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कथित पथराव के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज करना पड़ा। घटनाक्रम में महिला पुलिसकर्मी सहित करीब 6 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
प्रदर्शनकारी संबंधित पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त करने, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में बताया गया है।
हजारों की भीड़ ने किया थाने का घेराव, पथराव के बाद बिगड़ी स्थिति
मरार माली समाज के आह्वान पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किरनापुर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालते हुए नारेबाजी की और थाने पहुंचकर घेराव शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि गर्भवती महिला और उसके पति के साथ कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसी दौरान थाने पर कथित पथराव की स्थिति बनने के बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद लाठीचार्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
पहले ही निलंबित हो चुके हैं पुलिसकर्मी, फिर क्यों भड़का आक्रोश?
गौरतलब है कि मामले के सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, दो आरक्षकों और महिला आरक्षक मेघा टेकाम को तत्काल निलंबित किया था। पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया है।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जांच की गति धीमी है और संबंधित पुलिसकर्मियों को कथित रूप से बचाने की कोशिश की जा रही है। इसी नाराजगी ने बुधवार के प्रदर्शन को बड़े आंदोलन का रूप दे दिया।
अब सवाल यह है कि जब पुलिस विभाग ने निलंबन और एसआईटी जांच शुरू कर दी थी, तो फिर प्रदर्शनकारियों का भरोसा क्यों नहीं बन पाया?
पुलिस पर आरोप से लेकर थाने पर पथराव तक—अब निष्पक्ष जांच जरूरी
एक ओर गर्भवती महिला और उसके पति के साथ कथित पुलिस मारपीट के आरोपों ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर थाने पर पथराव और पुलिसकर्मियों के घायल होने की घटना भी कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
अब पूरे मामले में दोनों पक्षों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की एसआईटी जांच के साथ-साथ प्रदर्शन के दौरान पथराव, हिंसा और पुलिस बल प्रयोग की परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जांच इतनी पारदर्शी होगी कि पीड़ित परिवार और पुलिस, दोनों पक्षों का भरोसा कायम हो सके?
Legal Disclaimer: This report is based on information and allegations provided regarding the incident. The conduct of police personnel, protesters and other individuals remains subject to official investigation and legal determination.