गर्भ में बच्चा, सामने खाकी का कथित कहर! किरनापुर थाने में क्या हुआ?
A Baby in the Womb, Allegedly Facing the Brutality of the Khaki! What Happened at Kirnapur Police Station?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले के किरनापुर पुलिस थाने से पुलिसिया कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर और शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। 30 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके पति ने पुलिसकर्मियों पर घर से उठाकर थाने में कथित रूप से बर्बरतापूर्वक मारपीट करने, प्रताड़ित करने और जबरन अपराध कबूल करवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दो सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
डाकघर चोरी के शक में घर से उठाने का आरोप
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को किरनापुर डाकघर में हुई चोरी के मामले में संदेह के आधार पर मुण्डेसरा ग्राम पंचायत के टीमकीटोला निवासी सावित्रीबाई और उनके पति कैलाश चौधरी को उनके घर से पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए ले जाया गया। शिकायत में आरोप है कि दोनों को अलग-अलग कमरों में रखकर कपड़े उतरवाए गए और बेल्ट व डंडे से कथित रूप से बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई।
महिला का आरोप है कि उसे गंभीर शारीरिक प्रताड़ना देकर अपराध स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया। बाद में उसे जेल भेज दिया गया। फिलहाल जमानत पर बाहर आई महिला गंभीर हालत में जिला अस्पताल में उपचाररत बताई गई है।
गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
पीड़िता के परिजनों ने महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की जान को खतरा होने की आशंका जताई है। शिकायत में पुलिस पर रात में घर की तलाशी के दौरान 20 हजार रुपये नकद, जेवर और बाइक की चाबी ले जाने का भी आरोप लगाया गया है।
पीड़िता ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने, स्वतंत्र स्त्री रोग विशेषज्ञ बोर्ड से मेडिकल जांच कराने तथा थाने के सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर और स्टेशन डायरी को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की है। साथ ही पति-पत्नी को सुरक्षा और 50 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग भी की गई है।
चार पुलिसकर्मी निलंबित, एसआईटी करेगी जांच
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य मिश्रा ने किरनापुर थाने में पदस्थ चार पुलिसकर्मियों—तत्कालीन थाना प्रभारी उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपील बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम—को निलंबित कर दिया है।
मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई है और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस कार्रवाई के नाम पर कानून की सीमाएं लांघी गईं? एसआईटी की जांच और मेडिकल साक्ष्यों से ही इन गंभीर आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी।
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