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सरकारी स्कूल या जान का खतरा? सतना में प्लास्टर गिरा, महिला घायल.

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Government School or Death Trap? Plaster Falls in Satna, Woman Injured.

Special Correspondent, Satna, MP Samwad.

A woman cook was injured when plaster from a dilapidated government school building in Satna fell on her. Fortunately, 59 young children in the adjacent room were unharmed. The incident raised serious questions about building safety. Authorities have launched an investigation after public outcry.

MP संवाद, सतना जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित कन्या प्राथमिक शाला सिंहपुर के जर्जर भवन का प्लास्टर गिरने से एक महिला रसोइया घायल हो गई। प्लास्टर सीधे उसके ऊपर गिरा, जिससे उसकी कमर में गंभीर चोट आई है और वह खड़ी भी नहीं हो पा रही है।

घटना के तुरंत बाद स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापक रोशनी गर्ग और सरपंच रामशिरोमणि कोरी ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। हादसे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि यह हादसा उस कक्षा में नहीं हुआ, जहां स्कूली छात्राएं और आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे पढ़ाई कर रहे थे।


? ऐसे हुआ हादसा:

जानकारी के मुताबिक, सिंहपुर संकुल केंद्र के अंतर्गत संचालित कन्या प्राथमिक विद्यालय सिंहपुर की स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। इसी भवन में एक ओर प्राथमिक विद्यालय और दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। स्कूल में दो शिक्षिकाएं और 25 छात्राएं हैं। भोजन बनाने की जिम्मेदारी देवकी महिला स्व-सहायता समूह को सौंपी गई है, जिसमें दो रसोइयां — सावित्री सोनी और किरण कोरी कार्यरत हैं।

गुरुवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे दोनों महिलाएं भोजन बनाने स्कूल पहुंचीं। जैसे ही सावित्री सोनी कढ़ी बना रही थीं, तभी छत का प्लास्टर भरभराकर उनके ऊपर गिर गया। वह ज़मीन पर गिरकर अचेत हो गईं। उन्हें तत्काल शिक्षकों, सरपंच और उपसरपंच द्वारा नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

? दूसरे कक्ष में बैठे थे 59 मासूम बच्चे

जिस कक्ष में हादसा हुआ, उसी परिसर के दूसरे कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होता है, जिसमें उस समय करीब 59 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों की उम्र 3 से 5 वर्ष के बीच थी। यदि हादसा उस कक्ष में होता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते भवन का मेंटेनेंस नहीं कराया? और सिर्फ 13 साल में कोई भवन जर्जर कैसे हो गया? यह एक गंभीर जांच का विषय है।


? जांच के आदेश

इस संबंध में जब जिला परियोजना समन्वयक विष्णु त्रिपाठी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी ली जाएगी और जांच कराई जाएगी कि मात्र 13 वर्षों में भवन कैसे जर्जर हुआ। यदि भवन असुरक्षित पाया जाता है, तो छात्राओं को अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।

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