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नगर निगम ने लगाए डिवाइडर, लगते ही टूट रहे डिवाइडर.

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“The municipal corporation installed dividers, but they are breaking as soon as they are installed.”

“The municipal corporation installed dividers, but they are breaking as soon as they are installed.”

Mohan Nayak

कटनी। सड़क सुरक्षा को लेकर शहर में रोड सेफ्टी के तहत जो काम कराया उसकी गुणवत्ता भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। रोड सेफ्टी के अंतर्गत शहर में रेलिंग, जानकारी के मुताबिक रंबल, स्ट्रिप लगाने में लगभग एक करोड़ रुपए खर्च किए गए। शहर के बाजार में लगभग एक माहपूर्व रोड सेफ्टी के लिए लगाए गए यह उपकरण एक माह के अंदर ही टूट कर गिरने लगे हैं। कई जगह तो सड़क के बीचो-बीच लगाए गए पोल नुमा डिवाइडर टूटने के बाद नगर निगम ने वेल्डिंग कराकर जैसे तैसे उन्हें खड़ा तो कर दिया लेकिन शहर के बीचो-बीच नगर निगम कटनी ने जो भ्रष्टाचार की यह कहानी गढ़ी वह शहर वासियों के गले नहीं उतर रही। इन कार्यों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे नगर निगम प्रशासन ने कार्यों के नाम पर कमीशन बाजी का एक बड़ा खेल खेला हो। बाजार में सड़क के बीच लगाई जा रही रेलिंग लगने के साथ ही विवादों में घिरती नजर आ रही है।

कई जगह टूट गई रेलिंग
नगर निगम कटनी के द्वारा रोड सेफ्टी के तहत लगाई जा रही सड़क के बीचों-बीच रेलिंग मवेशियों एवं राहगीरों के धक्का लगने मात्र से ही टूट जा रही है। नगर निगम द्वारा कुछ इस तरह नगर निगम के इस कार्य से शहर की रोड सेफ्टी व्यवस्था में कुछ सुधार हो या ना हो लेकिन नगर निगम में बैठे जिम्मेदार लोगों के निजी हितों में इजाफा जरूर हो सकता है।

सूत्र बताते हैं कि नगर निगम कटनी को रोड सेफ्टी के तहत प्रदेश सरकार द्वारा एक करोड रुपए का बजट भेजा गया था। अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड से मिले इस पैसे के जरिए नगर निगम द्वारा एक बाहर की कंपनी के माध्यम से रेलिंग, रंबल एवं स्ट्रिप की खरीदी की गई। कहा तो यह भी जा रहा है कि चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम ने यह खरीदी की है।

जनता के पैसों का बंदर बाट
रोड सेफ्टी उपकरणों की खरीदी को लेकर बातचीत करते हुए बाजार में मौजूद व्यापारी मनोज चौबे, अनिल गुप्ता, विवेक जैन, राहुल पांडे, विजय आनंद जैन, तन्मय जैन सहित एक दर्जन से भी अधिक लोगों ने कहा को शहर की जनता शहर के विकास के लिए अपनी गाड़ी कमाई में से टैक्स के रूप में नगर निगम में जो पैसा जमा करती है उसका बंदर बांट नगर निगम के द्वारा हमेशा ही किया जाता है। विकास कार्यों में कमीशन बाजी के कारण शहर आज भी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। विकास की कसमें खाने वाले नगर निगम के जिम्मेदार लोग सत्ता पाते ही अपने विकास के वादे भूल कर खुद के विकास के कार्य में जुट जाते हैं।

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