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कटनी में मिलावटी मिठाई का खेल? जांच रिपोर्ट ने खोली परतें.

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Adulterated Sweets Racket in Katni? Investigation Report Exposes the Layers

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी। कटनी के बस स्टैंड स्थित चर्चित ‘लल्लू टी स्टॉल’ पर बिक रही बर्फी अब विवादों के घेरे में आ गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में दुकान की ‘लूज बर्फी’ को “मिथ्याछाप” पाए जाने के बाद न्याय निर्णायक अधिकारी एवं अपर कलेक्टर नीलांबर मिश्रा ने दुकान संचालक पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है।

इतना ही नहीं, 30 दिनों के भीतर जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर दुकान का लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी भी दी गई है। कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग और शहर के खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

औचक निरीक्षण में उठा बर्फी की गुणवत्ता पर संदेह

जानकारी के मुताबिक 28 अक्टूबर 2024 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओम प्रकाश साहू ने बस स्टैंड स्थित ‘लल्लू टी स्टॉल’ का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान दुकान में बिक्री के लिए रखी गई ‘लूज बर्फी’ की गुणवत्ता संदिग्ध दिखाई दी।

इसके बाद नियमानुसार बर्फी के 500-500 ग्राम के चार नमूने लेकर उन्हें सीलबंद किया गया और जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया।

भोपाल लैब की रिपोर्ट में ‘मिथ्याछाप’ घोषित

भोपाल स्थित खाद्य प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में बर्फी को “मिथ्याछाप” घोषित किया गया। रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26(2)(ii) और धारा 52 के तहत मामला दर्ज करते हुए न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया।

बार-बार नोटिस के बाद भी नहीं पहुंचा दुकानदार

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दुकान संचालक मनसुखलाल जायसवाल को कई बार नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। लेकिन आरोपी न तो अदालत में उपस्थित हुआ और न ही कोई जवाब या सफाई पेश की।

अदालत ने इसे अपराध की “मूक स्वीकृति” मानते हुए मामले की एकतरफा सुनवाई की।

जुर्माना नहीं भरा तो लाइसेंस होगा निरस्त

अपर कलेक्टर एवं न्याय निर्णायक अधिकारी ने दोषी पाए जाने पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित ट्रेजरी चालान के माध्यम से 30 दिनों के भीतर राशि जमा करनी होगी और उसकी प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी।

यदि तय समय सीमा के भीतर जुर्माना जमा नहीं किया गया, तो खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 96 के तहत दुकान का व्यापारिक लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस कार्रवाई ने एक बार फिर शहर में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच नहीं होती, तो लोग कब तक ऐसी संदिग्ध मिठाइयां खाते रहते?

बड़ा सवाल

क्या शहर में खुलेआम बिक रही हैं ‘मिथ्याछाप’ मिठाइयां? और खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी आखिर कितनी मजबूत है?

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