रेफर तो किया, लेकिन सहारा नहीं दिया! एमवाय अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल.
Referred for Treatment, But Left Without Support! Questions Raised Over MY Hospital’s Arrangements.

Special Correspondent, Ram Lakhan Yadav, Indore, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) एक बार फिर अपनी व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। भीषण गर्मी के बीच एक गंभीर रूप से बीमार 11 वर्षीय बालक को इलाज के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन परिजनों को न तो एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई और न ही पर्याप्त सहायता मिली।
मजबूर माता-पिता को अपने बेटे को स्ट्रेचर पर लिटाकर स्वयं अस्पताल परिसर से दूसरे अस्पताल तक ले जाना पड़ा। इस दौरान बच्चे की मां उसे गर्मी से बचाने के लिए बार-बार पानी में दुपट्टा भिगोकर उसके शरीर पर रखती रही।
वायरल वीडियो ने झकझोर दी संवेदनाएं
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रदेशभर में चर्चा शुरू हो गई। वीडियो में दिखाई दे रही बेबसी ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता और मानवीय संवेदनाओं की कमी का उदाहरण बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
गंभीर बीमारी से जूझ रहा था बालक
जानकारी के अनुसार बालक रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित था। चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए उसे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया था।
परिजनों का आरोप है कि रेफरल के बाद उन्हें कोई परिवहन सुविधा नहीं मिली। अस्पताल कर्मचारियों से मदद मांगने के बावजूद संतोषजनक सहयोग नहीं मिला, जिसके बाद वे खुद ही स्ट्रेचर धकेलकर बच्चे को दूसरे अस्पताल तक ले जाने को मजबूर हुए।
मां का दुपट्टा बना बेटे की ढाल
तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच बच्चे को अस्पताल तक ले जाने का दृश्य लोगों को भावुक कर गया। वायरल वीडियो में मां बार-बार दुपट्टा पानी में भिगोकर बच्चे के शरीर पर रखती दिखाई देती है, ताकि उसे गर्मी से राहत मिल सके।
यह दृश्य केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल बन गया।
वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया प्रशासन
मामले ने तूल पकड़ा तो स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ। एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
प्रारंभिक जांच में व्यवस्थागत लापरवाही सामने आने पर संबंधित चिकित्सक के सात दिन के वेतन की कटौती का निर्णय लिया गया। वहीं तीन नर्सिंग अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोका गया और सुरक्षा व्यवस्था में चूक मानते हुए सुरक्षा प्रभारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
सवाल यह नहीं कि कार्रवाई हुई, सवाल यह है कि चूक क्यों हुई?
घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है। यदि वीडियो वायरल नहीं होता तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती? और क्या प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में एक गंभीर मरीज को अस्पताल से अस्पताल तक ले जाने के लिए न्यूनतम व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी?
स्वास्थ्य व्यवस्था की परीक्षा
अस्पताल प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और रेफरल प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का आश्वासन दिया है।
लेकिन यह घटना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की उस वास्तविक तस्वीर को सामने लाती है, जहां संसाधनों और व्यवस्थाओं की कमी का सबसे बड़ा बोझ आम मरीज और उसके परिवार को उठाना पड़ता है।
अब देखना यह होगा कि यह मामला केवल कार्रवाई तक सीमित रहता है या वास्तव में व्यवस्थाओं में सुधार भी दिखाई देता है।