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TET बना तनाव! शिक्षकों पर परीक्षा का दबाव.

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TET Becomes a Stress Point! Teachers Face Exam Pressure Again.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सरकार द्वारा 2026 में विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने के फैसले के बाद हजारों शिक्षकों में असंतोष और चिंता बढ़ गई है।

सालों से सेवा दे रहे शिक्षक अब खुद को एक ऐसे चक्र में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं, जहां नौकरी करने के बावजूद बार-बार अपनी योग्यता साबित करनी पड़ रही है।

हम पढ़ा रहे हैं, फिर भी अपात्र क्यों?

कई शिक्षकों का कहना है कि:
👉 वे पिछले 10-20 वर्षों से पढ़ा रहे हैं
👉 छात्रों के रिजल्ट बेहतर आ रहे हैं
👉 फिर भी उन्हें अपात्र मानकर दोबारा परीक्षा देने को मजबूर किया जा रहा है

एक शिक्षक ने कहा,
“अगर हम अयोग्य हैं तो इतने सालों तक हमें पढ़ाने क्यों दिया गया?”

बार-बार परीक्षा, मानसिक दबाव बढ़ा

शिक्षकों के अनुसार:

  • अब 2026 में फिर से ‘अंतिम मौका’ बताकर परीक्षा थोप दी गई है

👉 इससे

  • मानसिक तनाव
  • असुरक्षा की भावना
  • नौकरी जाने का डर

लगातार बढ़ रहा है।

पुराने शिक्षकों के साथ अलग व्यवहार क्यों?”

शिक्षकों ने एक बड़ा सवाल उठाया है:

👉 साल 2023 में पहली बार दो परीक्षाएं आयोजित हुईं जिनमें एक पात्रता परीक्षा और दूसरी चयन परीक्षा थी.
👉 तो फिर 2023 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों पर यह नियम समान रूप से क्यों लागू नहीं किया जा रहा?

👉 क्या यह नीति

  • समानता के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है?
  • या फिर चयनात्मक सख्ती दिखाई जा रही है?

नौकरी पर तलवार लटक रही है”

सरकार के आदेश के अनुसार:
👉 जो शिक्षक परीक्षा में असफल होंगे
👉 उनके प्रमोशन, वेतन वृद्धि और सेवा पर असर पड़ सकता है

इससे शिक्षक खुद को
👉 नौकरी के अस्थिर माहौल में खड़ा महसूस कर रहे हैं

बड़ा सवाल: अनुभव बड़ा या परीक्षा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है:

👉 क्या वर्षों का अनुभव ज्यादा महत्वपूर्ण है
👉 या एक लिखित परीक्षा के आधार पर शिक्षक की योग्यता तय होगी?

👉 क्या यह फैसला

  • शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा
  • या फिर अनुभवी शिक्षकों को हतोत्साहित करेगा?

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