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मजदूर दिवस पर भी बेहाल हाथ: कटनी में श्रमिकों की चुप्पी का दर्द.

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MP’s invisible workforce: Katni laborers face daily struggles for fair wages. Their stories will shock you!

Daily wage workers waiting for work in Katni labor market, highlighting exploitation of unregistered laborers in Madhya Pradesh

कटनी की मजदूर मंडी: रोज़ सुबह आशा लेकर आते हैं, शाम को निराशा लौटते हैं!

On Labour Day, Still Empty Hands: The Silent Struggles of Workers in Katni.

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

Katni’s daily labor markets expose worker exploitation! Despite govt schemes, thousands remain unregistered, face wage theft & abuse. On #LabourDay, we demand justice for MP’s invisible workforce.

1 मई, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर दुनिया भर में मजदूरों के सम्मान और अधिकारों की बात होती है, लेकिन कटनी जिले की हकीकत चौंकाने वाली है। यहाँ आजाद चौक, चांडक चौक, सुभाष चौक, खरहनी और माधवनगर कैम्प में रोज़ सुबह से ही “मानव मंडी” सजती है, जहाँ मजदूरों से दिनभर की मजदूरी की बोली लगाई जाती है।

क्या है समस्या?

  • पंजीयन न होना: हज़ारों मजदूर सरकारी योजनाओं से वंचित।
  • शोषण: काम के बाद पैसे न देना, मारपीट और गाली-गलौज आम।
  • अनिश्चितता: कभी 300, कभी 400 रुपये मजदूरी; कई दिन काम ही नहीं।

“काम मिला तो ठीक, नहीं तो खाली पेट लौटना… यही हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी है,”
– शिवा कोल, ईंट-बालू मजदूर


गहराता संकट: आंकड़े बनाम हकीकत

विवरण आधिकारिक आंकड़े जमीनी हालात
पंजीकृत मजदूर 3.55 लाख (जिले में) हज़ारों अभी भी अंधेरे में
नगरीय पंजीकरण 35,000 (निगम के अनुसार) अधिकांश बिना रजिस्ट्रेशन
योजनाओं का लाभ 11 कल्याणकारी योजनाएं पहुँच नहीं

मजदूरों की पीड़ा: ज़ुबानी बयान

  1. रामू अहिरवार (माधवनगर):
    “पिछले हफ्ते एक ठेकेदार ने चूना-गारा का काम करवाया, लेकिन पैसे नहीं दिए। पूछने पर धमकाया!”
  2. मीना बाई (खरहनी):
    “3 दिन से बैठी हूँ, आज भी काम नहीं मिला। घर में राशन खत्म…”

सरकारी दावे vs हकीकत

✅ शासन का दावा:

  • संबल योजना, विवाह सहायता, प्रसूति लाभ, आयुष्मान कार्ड जैसी 11 योजनाएँ।
  • मृत्यु पर 4 लाख तक की सहायता।

❌ जमीनी सच:

  • दस्तावेज़ों की कमी: अधिकांश मजदूरों के पास आधार, बैंक खाता नहीं।
  • भ्रष्टाचार: मध्यस्थ पैसा खाते हैं, लाभ नहीं पहुँचता।

विशेषज्ञ की राय:

अमित शुक्ला (अधिवक्ता संघ अध्यक्ष):
“जिले में श्रम न्यायालय बने ताकि मजदूरों की शिकायतों का त्वरित निपटारा हो। हम इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

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