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जेल में न्याय या निजी बदला? कटनी से उठी सनसनीखेज शिकायत.

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Justice in Jail or Personal Vendetta? Sensational Complaint Emerges from Katni.

MP संवाद समाचार, कटनी.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.

कानून की रक्षा और सुधार के उद्देश्य से बनाई गई जेल व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं, जब उसी व्यवस्था के भीतर प्रताड़ना, पक्षपात और कथित संरक्षण के आरोप सामने आने लगें। कटनी जिला जेल से आई एक शिकायत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

जेल में निरुद्ध एक अभियुक्त और उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि एक प्रहरी द्वारा व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते लगातार प्रताड़ना दी जा रही है, जबकि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।

गवाही के बाद शुरू हुई प्रताड़ना?

जिला जेल में पदस्थ एक प्रहरी एवं वार्ड प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जेल में बंद अभियुक्त मोहित धामेचा का दावा है कि उसने पूर्व में संबंधित प्रहरी के खिलाफ अदालत में गवाही दी थी, जिसके बाद से वह लगातार शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का सामना कर रहा है।

मोहित के अनुसार, गवाही देने के बाद उसके प्रति जेल के भीतर व्यवहार पूरी तरह बदल गया और उसे निशाना बनाया जाने लगा।

मां की चेतावनी: “बेटे को कुछ हुआ तो जिम्मेदार कौन?”

मोहित धामेचा की मां पूजा धामेचा ने जेल महानिदेशक और कटनी पुलिस अधीक्षक को कई बार लिखित शिकायतें भेजी हैं।

उन्होंने अपने आवेदन में आशंका जताई है कि यदि उनके बेटे के साथ जेल में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए संबंधित प्रहरी और कथित रूप से उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

परिवार का आरोप है कि 25 मई 2026 को दोबारा शिकायत दिए जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

जेल के भीतर मारपीट और धमकियों के आरोप

शिकायत के साथ संलग्न लिखित बयान में मोहित ने आरोप लगाया है कि जुलाई 2025 से वार्ड नंबर 10 में निरुद्ध रहने के दौरान उसके साथ कई बार मारपीट की गई।

उसका दावा है कि अन्य बंदियों के माध्यम से भी उसे प्रताड़ित कराया गया तथा लगातार अपमानजनक भाषा और धमकियों का सामना करना पड़ा।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसे एक अन्य चर्चित कैदी की तरह अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई।

“ऊपर तक संरक्षण” का दावा, जांच पर उठे सवाल

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि संबंधित प्रहरी खुलेआम यह दावा करता है कि उसे वरिष्ठ स्तर तक संरक्षण प्राप्त है, इसलिए उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ रही, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

मानसिक दबाव में कैदी, परिवार की बढ़ी चिंता

परिवार का कहना है कि लगातार प्रताड़ना और भय के माहौल का असर मोहित की मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है।

मां ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा है कि किसी भी अप्रिय घटना से पहले प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

बड़ा सवाल: शिकायतों पर कार्रवाई कब?

कटनी जिला जेल से जुड़े इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी?
  • क्या आरोपों की सत्यता सामने लाई जाएगी?
  • क्या जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित है?
  • यदि शिकायतें झूठी हैं तो उनकी सच्चाई सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
  • और यदि आरोप सही हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं। लेकिन एक बात तय है कि जेल जैसी संवेदनशील संस्था से जुड़े ऐसे आरोप प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग जरूर करते हैं।

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