बीज खरीदा या मुसीबत? फसल बर्बाद, बिल नदारद—कटनी में किसानों का बड़ा आरोप.
Seed or Trouble? Crop Ruined, Bill Missing—Katni Farmers Raise Serious Allegations.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले के बाकल थाना क्षेत्र अंतर्गत पटवारी हल्का नंबर 11 के ग्राम मझगवां में किसानों की धान की फसल खराब होने का मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि अमानक बीज और कृषि दवाइयों के इस्तेमाल के कारण उनकी खड़ी फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने कुछ बीज एवं कृषि दवा विक्रेताओं पर पक्का बिल नहीं देने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से मामले की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और नुकसान की भरपाई की मांग की है।
हालांकि, फसल खराब होने का वास्तविक कारण कृषि विभाग की जांच और बीज-दवा के नमूनों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल किसानों के आरोपों ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
खेत में खड़ी फसल बर्बाद, किसान के सामने अगली फसल का संकट
फसल खराब होने के बाद किसानों के सामने अब दोहरी परेशानी है। एक ओर धान की खड़ी फसल से होने वाली आय पर संकट आ गया है, वहीं दूसरी ओर फसल लगाने की अवधि भी लगभग समाप्त होने के कारण खेतों में अब क्या बोया जाए, यह बड़ा सवाल बन गया है।
किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में फसल खराब होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
8 पैकेट बीज खरीदा, खेत में फसल नहीं बनी—किसान का आरोप
किसान लल्लू यादव ने आरोप लगाया कि उन्होंने बाकल स्थित अग्रवाल बीज भंडार से फुल पेज धान के आठ पैकेट खरीदे थे। उनके अनुसार बीज खेत में अपेक्षित रूप से नहीं जमा और इसके चलते खेत खाली पड़े हैं।
किसान का कहना है कि यदि बीज की गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें खरीदी का पक्का बिल उपलब्ध नहीं कराया गया।
यह आरोप जांच का विषय है और इसकी पुष्टि संबंधित बीज के नमूने, बिक्री रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच से ही हो सकेगी।
दवा के छिड़काव के बाद दो एकड़ फसल खराब होने का दावा
किसान मनोज यादव ने बताया कि उन्होंने धान में उपयोग के लिए इस्माइल भाई जान के यहां से कृषि दवा खरीदी थी। किसान के अनुसार दवा का छिड़काव करने के बाद लगभग दो एकड़ में खड़ी धान की फसल नष्ट हो गई।
किसान ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित दवा का नमूना लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए और फसल खराब होने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।
किसानों ने तहसीलदार, पटवारी और पुलिस को दी जानकारी
किसानों का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी तहसीलदार और पटवारी को दी है। पुलिस को भी मामले से अवगत कराने की बात किसानों ने कही है।
अब किसानों की मांग है कि कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर खराब फसल का पंचनामा एवं सर्वेक्षण करे। साथ ही जिन बीजों और कृषि दवाइयों के इस्तेमाल की शिकायत है, उनके नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
अमानक मिला तो लाइसेंस पर कार्रवाई की मांग
किसानों ने मांग की है कि यदि जांच में बीज या कृषि दवाइयां निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाई जाती हैं, तो संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और आवश्यक होने पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाए।
किसानों ने कृषि सामग्री की खरीद पर पक्का बिल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में किसान के पास खरीद का वैध प्रमाण मौजूद रहे।
ग्राम पंचायत के सरपंच बुद्धू लाल यादव ने भी किसानों की समस्या पर चिंता जताते हुए अमानक बीज एवं कृषि दवाइयों की बिक्री पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की मांग की है।
अब जांच से खुलेगा फसल बर्बादी का असली कारण
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि फसल वास्तव में अमानक बीज के कारण खराब हुई, कृषि दवा के कारण, मौसम/रोग के कारण या किसी अन्य वजह से?
इसका जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मौके के सर्वे, फसल परीक्षण, बीज एवं दवा के नमूनों की प्रयोगशाला जांच और किसानों के खरीद दस्तावेजों से सामने आएगा।
प्रशासन और कृषि विभाग के सामने अब किसानों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है। यदि किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ प्रभावित किसानों को उपलब्ध वैधानिक राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाना जरूरी होगा।
किसानों की मांग साफ है—फसल का सर्वे हो, बीज-दवा की जांच हो और दोषी मिलने पर कार्रवाई के साथ नुकसान की भरपाई का रास्ता निकले।
Legal Disclaimer
This report presents farmers’ allegations and demands as reported; responsibility is not established unless verified through official investigation and competent authorities.