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आयुष्मान योजना में बड़ा खेल? कागजों में 45 स्टाफ, जांच में सिर्फ 15 नाम!

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Big Question Over Ayushman Scheme? 45 Staff Listed on Paper, Only 15 Names Found in Investigation!

भोपाल के सृष्टि अस्पताल में आयुष्मान योजना की EOW जांच
आयुष्मान योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर सृष्टि अस्पताल EOW जांच के घेरे में।

MP संवाद समाचार, भोपाल।

गरीब परिवारों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना में भोपाल से सामने आया मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने करोंद स्थित सृष्टि अस्पताल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी के अनुसार अस्पताल पर योजना के नियमों के उल्लंघन, कथित फर्जी स्टाफ विवरण और पैथोलॉजी रिपोर्ट में कथित जाली हस्ताक्षर के आरोप हैं।

45 स्टाफ की एंट्री, लेकिन अलग-अलग नाम करीब 15

EOW की जांच में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की ऑनलाइन स्टाफ सूची को लेकर सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार आयुष्मान पोर्टल पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की 45 एंट्री दिखाई गई थीं, लेकिन जांच में अलग-अलग नाम करीब 15 ही मिले। कई नामों को कथित तौर पर तीन से चार बार दोहराया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि इन 45 एंट्री के सामने एक ही मोबाइल नंबर दर्ज था, जिसे अस्पताल संचालक से जुड़ा बताया गया है। एजेंसी ने डॉक्टरों और कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन तथा उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड मांगे, लेकिन जांच रिपोर्टों के अनुसार ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।

यहीं से सवाल उठता है—क्या आयुष्मान योजना में अस्पतालों की स्टाफ क्षमता का सत्यापन सिर्फ कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रह गया है?

पैथोलॉजिस्ट के नाम पर रिपोर्ट, हस्ताक्षर पर उठे सवाल

जांच में एक महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम भी अस्पताल की सूची में कई बार दर्ज पाया गया। संबंधित डॉक्टर ने कथित तौर पर जांच एजेंसी को बताया कि उन्होंने सृष्टि अस्पताल में काम नहीं किया और अपने दस्तावेज या नाम इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी।

इसके अलावा अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग के नाम से जारी कुछ रिपोर्टों पर एक MD पैथोलॉजिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और सील मिली। संबंधित डॉक्टर ने जांच में इन रिपोर्टों पर मौजूद हस्ताक्षर को अपना नहीं बताया। EOW ने यह भी कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में अस्पताल की पैथोलॉजी लैब के संचालन की अनुमति नहीं मिली।

यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित तौर पर ऐसी कुछ रिपोर्टें उन मरीजों से जुड़ी थीं, जिनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत दिखाया गया।

709 हितग्राही और अब सबसे बड़ा सवाल—कितना भुगतान हुआ?

रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में 709 आयुष्मान हितग्राहियों का इलाज सृष्टि अस्पताल में दर्ज था। अब EOW की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि इन मरीजों के इलाज के आधार पर सरकार से कितनी राशि का भुगतान हुआ और कथित अनियमितताओं का उन क्लेम पर क्या प्रभाव पड़ा।

अस्पताल वर्ष 2023 में आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध हुआ था। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी है कि सूचीबद्धता और उसके बाद की निगरानी के दौरान डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, पैथोलॉजी सुविधा और वास्तविक संसाधनों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?

EOW ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। एजेंसी अब कथित भुगतान और मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

आयुष्मान जैसी योजना का उद्देश्य गरीब मरीजों तक इलाज पहुंचाना है। ऐसे में जांच का असली सवाल केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है—बल्कि यह भी है कि सरकारी भुगतान से जुड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में ग्राउंड-लेवल सत्यापन और निगरानी कितनी प्रभावी है।

Legal Disclaimer: This report is based on information attributed to investigating agencies and published media reports. Allegations mentioned in the report are not established facts unless proven through due legal process. The accused persons are presumed innocent until proven guilty by a competent court.

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