क्रूज खत्म, सबूत खत्म! आखिर किसे बचाने की थी इतनी जल्दी?
Cruise Destroyed, Evidence Gone! Who Was Being Protected in Such a Hurry?

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, जबलपुर। दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को जांच पूरी होने से पहले ही नष्ट किए जाने का मामला अब गंभीर कानूनी विवाद बनता जा रहा है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच आयोग ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। मंच का दावा है कि भारतीय कानून में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि जांच से पहले किसी दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को नष्ट किया जा सकता है।
मामले की सुनवाई जस्टिस संजय द्विवेदी के समक्ष हुई, जहां याचिकाकर्ताओं ने जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।
“कानून में नहीं है ऐसा कोई प्रावधान”
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने अपनी याचिका में कहा कि इंडियन वेसल एक्ट 2021 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें जांच से पहले दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को नष्ट करने की अनुमति दी गई हो।
याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन को भी ऐसा अधिकार प्राप्त नहीं है कि वह बिना तकनीकी जांच पूरी हुए क्रूज को खत्म कर दे।
जांच आयोग ने भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी ने निर्देश दिए कि मंच द्वारा प्रस्तुत सभी बिंदुओं को जांच में प्रमुखता से शामिल किया जाए। साथ ही मंच को दोबारा सुनवाई के दौरान उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
इस टिप्पणी के बाद पूरे मामले में जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।
NGT आदेश का हवाला, फिटनेस पर उठे सवाल
याचिका में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 12 सितंबर 2023 के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि क्रूज में फोर स्ट्रोक इंजन होना अनिवार्य था।
लेकिन दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में कथित तौर पर केवल 100 HP का इंजन था और उसका दूसरा इंजन भी फेल बताया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि क्रूज संचालकों के पास नियमों के पालन से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज भी नहीं थे।
“जब क्रूज नष्ट कर दिया तो फिटनेस जांच कैसे होगी?”
मामले का सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है। जांच आयोग ने भी चिंता जताई कि जब क्रूज को ही नष्ट कर दिया गया, तो उसकी तकनीकी फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच आखिर कैसे होगी?
आयोग ने इस बिंदु पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि जांच से पहले सबूत ही खत्म कर दिए गए, तो जिम्मेदारी तय कैसे होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी दुर्घटना की निष्पक्ष जांच के लिए मूल साक्ष्यों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी होता है।
बड़ा सवाल
क्या जांच से पहले क्रूज नष्ट कर सबूत मिटा दिए गए? और आखिर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कौन करेगा?