पदोन्नति पर ‘ब्रेक’! विदिशा मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों ने खोला मोर्चा.
Promotion Process Hits the Brakes! Teachers at Vidisha Medical College Launch Protest.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, विदिशा/भोपाल। अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (ABVGMC), विदिशा के चिकित्सा शिक्षक संघ (MTA) ने पदोन्नति प्रक्रिया में कथित नीतिगत विसंगतियों के विरोध में चरणबद्ध शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन के पहले चरण में चिकित्सा शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया, जबकि सभी शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय सेवाएं सामान्य रूप से जारी रखीं।
संघ के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को प्रातः एक घंटे की सांकेतिक OPD पेन-डाउन हड़ताल की जाएगी। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं, भर्ती मरीजों का उपचार तथा जांच सेवाएं पूरी तरह सुचारु रहेंगी।
पदोन्नति प्रक्रिया पर APAR नियम बना विवाद का कारण
चिकित्सा शिक्षक संघ का कहना है कि राज्य शासन द्वारा वर्षों बाद पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ किया जाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के 30 जून 2026 के पत्र के अनुसार पदोन्नति के लिए पिछले पांच वर्षों की APAR/CR अनिवार्य किए जाने से विदिशा मेडिकल कॉलेज का कोई भी पात्र चिकित्सा शिक्षक वर्तमान प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहा है।
संघ का दावा है कि संबंधित शिक्षक राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों एवं विभागीय नियमों के अनुसार विधिवत नियुक्त एवं पात्र हैं।
‘देश के अन्य राज्यों में ऐसा नियम नहीं’
संघ का कहना है कि पहले एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के पद क्रमशः चार एवं तीन वर्ष की सेवा पर सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाते रहे हैं, जबकि वर्तमान व्यवस्था में प्रभावी पात्रता अवधि पांच वर्ष हो गई है।
संघ के अनुसार, इससे न केवल पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि संकाय की कमी के कारण NMC मान्यता, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की संभावनाएं तथा मरीजों को मिलने वाली विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
संघ की प्रमुख मांगें
चिकित्सा शिक्षक संघ ने शासन से निम्न मांगें रखी हैं—
- APAR/CR संबंधी प्रशासनिक स्पष्टीकरण तत्काल जारी किया जाए।
- NMC मानकों, आदर्श सेवा नियम-2018 तथा पदोन्नति नियम-2025 के बीच पात्रता अवधि की विसंगति का उच्चस्तरीय परीक्षण कराया जाए।
- चिकित्सा महाविद्यालयों में संकाय पद लंबे समय तक रिक्त न रहें, इसके लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
‘मरीजों के हित प्रभावित नहीं होंगे’
संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह सांकेतिक है और मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आपातकालीन सेवाएं, भर्ती मरीजों का उपचार तथा जांच सेवाएं पूर्ववत संचालित होती रहेंगी।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन द्वारा शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन के अगले चरण पर विचार किया जाएगा।
Legal Disclaimer
This report is based on the Medical Teachers Association’s official statement. Government authorities may issue clarifications, responses, or policy decisions subsequently.
