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टावर लगाने के नियम अब तक धुंधले? NGT ने सरकार और BMC से मांगा साफ SOP.

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Tower Rules Unclear So Far? NGT Asks Government and BMC for Clear SOP.

भोपाल में आवासीय इलाके की इमारत की छत पर लगा मोबाइल टावर, जिसके लिए NGT ने SOP बनाने के निर्देश दिए
भोपाल में मोबाइल टावरों की स्थापना पर NGT ने सरकार और BMC को SOP बनाने के निर्देश दिए हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

MP संवाद समाचार, भोपाल। विशेष संवाददाता: ऋचा तिवारी.

भोपाल में मोबाइल टावरों पर अब नियमों की नकेल कसने की तैयारी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने मध्यप्रदेश सरकार और भोपाल नगर निगम (BMC) को टावर लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का निर्देश दिया है। सवाल यह है कि अब तक अनुमति की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट और एकरूप थी?

स्कूल-अस्पताल के पास टावर: अब तय होंगे नियम

NGT ने नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव और BMC से ऐसा SOP मांगा है, जिसमें स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान, जेल, आवासीय और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास टावर लगाने के लिए स्थानीय भूमि उपयोग और भवन नियम शामिल हों। ट्रिब्यूनल ने कहा कि फैसले वैज्ञानिक अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हों। स्पष्ट मानक बने तो अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ सकती है।

रेडिएशन की जांच, 15 दिन में प्रमाणपत्र

दूरसंचार विभाग (DoT) की TERM सेल (टेलीकॉम एनफोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनिटरिंग) को टावरों के रेडिएशन की नियमित जांच करने को कहा गया है। तय मानकों से अधिक उत्सर्जन मिला तो नियमानुसार सुधारात्मक कार्रवाई होगी। टेलीकॉम कंपनियों को 15 दिन के भीतर अनुपालन या स्व-प्रमाणपत्र देना होगा। टावरों पर लगे डीजल जनरेटर (DG) सेट भी पर्यावरणीय नियमों के दायरे में हैं, यानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति और वायु-ध्वनि प्रदूषण मानकों का पालन जरूरी होगा।

EMR की मूल मांग अस्वीकार, फिर भी निर्देश

LawSathi Research के अनुसार ट्रिब्यूनल ने विद्युत-चुंबकीय विकिरण (EMR) से जुड़ी मूल मांग को अपने अधिकार क्षेत्र के संदर्भ में स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद टावर स्थापना, DoT मानकों के पालन, निगरानी और स्थानीय नियमों पर प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए।

अब निगाहें इस पर हैं कि सरकार और BMC SOP कब बनाते हैं, और उसमें संवेदनशील संस्थानों के लिए वास्तविक दूरी, अनुमति और निगरानी के क्या नियम तय होते हैं। कहीं यह निर्देश भी फाइलों में ही न दब जाए?

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Legal Disclaimer: This article is based on reports published by The Times of India and LawSathi Research and other publicly available information at the time of publication. The directions attributed to the National Green Tribunal are as reported and should be verified against the original order. This report does not claim that mobile tower radiation causes harm to health, and it does not allege any violation, negligence or wrongdoing by any individual, company or department. MP Samwad News shall not be liable for any inaccuracies arising from third-party sources. Corrections or clarifications are welcome and may be sent to the editorial desk.

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