छोटे तालाब में घुलता गंदा सच: MPPCB ने BMC पर आंकी ₹2.10 करोड़ की क्षतिपूर्ति.
Dirty Truth Dissolving in Chhota Talab: MPPCB Assesses ₹2.10 Crore Compensation Against BMC.

MP संवाद समाचार, भोपाल। विशेष संवाददाता: ऋचा तिवारी.
भोपाल की ऐतिहासिक लोअर लेक (छोटा तालाब) में अनुपचारित सीवेज पहुंचने का मामला अब नगर निगम के लिए बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने भोपाल नगर निगम (BMC) पर ₹2.10 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति आंकी है। सवाल सीधा है: झील में गंदगी पहुंची कैसे, और जिम्मेदार एजेंसियां तब कहां थीं?
झील में गंदा पानी, जवाबदेही किसकी?
लोअर लेक का मुद्दा सिर्फ पर्यावरण का नहीं, शहर के जलस्रोतों और सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी है। जब क्षतिपूर्ति आंकनी पड़ी, तो साफ है कि सीवेज रोकने के इंतजाम कहीं न कहीं कमजोर पड़े। हालांकि क्षतिपूर्ति आंके जाने का अर्थ यह नहीं कि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी तय हो गई है। आगे की कार्रवाई संबंधित आदेशों और जांच पर निर्भर करेगी।
NGT का शिकंजा: हर नाले का हिसाब देना होगा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने BMC को अपर लेक, लोअर लेक, कोलार सहित सभी जलस्रोतों में जाने वाले सीवेज आउटफॉल और नालों की जीपीएस निर्देशांक व प्रवाह माप के साथ मैपिंग के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने सीवेज उत्पादन, संग्रहण और उपचार की वास्तविक मात्रा, STP की क्षमता और उपयोग का ब्यौरा भी मांगा है। बिना उपचारित सीवेज का आकलन कर उसे रोकने की समयबद्ध योजना बनाने को भी कहा गया है।
करोड़ों का खर्च, फिर भी गंदगी क्यों?
अप्रैल 2026 में BMC ने लोअर लेक और शाहपुरा लेक के पुनर्जीवन के लिए लगभग ₹12 करोड़ की परियोजना बताई थी। बाणगंगा नाले के प्रदूषण को रोकने के लिए 10 MLD का STP लगाने की योजना भी सामने आई थी। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि झील संरक्षण पर खर्च और जमीनी नतीजों के बीच इतना फासला क्यों है?
अब निगाहें इस पर हैं कि BMC सीवेज के स्रोत कितनी तेजी से बंद करता है, या फिर झील की सफाई के दावे कागजों में ही तैरते रहेंगे।
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