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बालाघाट बाघ मौत का नया मामला: भूख से मौत की आशंका, जबलपुर भेजे गए नमूने.

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Balaghat Tiger Death: Starvation Feared as Cause, Viscera Samples Sent to Jabalpur for Forensic Tests.

बालाघाट के कटंगी परिक्षेत्र में नहलेसरा डेम के पास बाघ के शव की जांच करते वन विभाग के अधिकारी
नहलेसरा डेम पर बाघ का शव मिलने के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी। (फोटो: MP संवाद)

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। विशेष संवाददाता: आनंद तामरकर

कटंगी परिक्षेत्र के नहलेसरा बीट में मंगलवार को एक नर बाघ का शव डेम में तैरता मिला। दोपहर 2 से 3 बजे के बीच सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। सीसीएफ, डीएफओ बालाघाट और पेंच टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा मौके पर पहुंचे। सिवनी और बालाघाट दोनों जिलों की डॉग स्क्वाड ने क्षेत्र की सर्चिंग की। शाम करीब 4 बजे शव बाहर निकाला गया, जो 2-3 दिन पुराना और पानी में फूला हुआ था।

भूख से मौत की आशंका, पेट में अन्न का एक कण नहीं

कटंगी एसडीओ यशपाल मेहरा के अनुसार बाघ की उम्र 13-14 साल थी। दांत पूरी तरह घिसे थे और एक केनाइन दांत टूटा हुआ था। पोस्टमार्टम में पेट और आंतें खाली मिलीं। विभाग ने प्रथम दृष्टया भूख से मौत की आशंका जताई है। अधिकारी ने साफ कहा कि मौत का अंतिम कारण अभी तय नहीं है।

शिकार की आशंका खारिज, जबलपुर भेजे गए नमूने

अधिकारियों के मुताबिक शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, और नाखून व दांत सुरक्षित हैं। एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) की गाइडलाइन के तहत हृदय, फेफड़े, त्वचा सहित अंगों के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए जबलपुर भेजे गए हैं। रिपोर्ट एक-दो दिन में आने की उम्मीद है। नियमानुसार अधिकारियों की मौजूदगी में शाम को ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

पहचान अब भी रहस्य, निगरानी तंत्र कटघरे में

डेम दोनों जिलों की सीमा पर है, इसलिए यह अब तक साफ नहीं कि बाघ पेंच टाइगर रिजर्व का था या बालाघाट दक्षिण वन मंडल का। विभाग कैमरा ट्रैप की पुरानी तस्वीरों से मिलान कर रहा है। बालाघाट और सिवनी में बीते एक साल में करंट, आपसी संघर्ष और बीमारी से बाघों की मौतें सामने आई हैं। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बुजुर्ग बाघ शिकार नहीं कर पाते और जंगल के किनारे आ जाते हैं। उनकी मांग है कि ऐसे बाघों के लिए विशेष निगरानी और रेस्क्यू योजना बने। विभाग ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

सवाल यही है: क्या एक बुजुर्ग बाघ को बचाया जा सकता था?

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Legal Disclaimer: This article is based on statements made by forest department officials and information available at the time of publication. The cause of death is yet to be officially confirmed pending forensic and histopathology reports. The views of wildlife enthusiasts quoted herein are their own and do not necessarily reflect the views of MP Samwad News. No allegation of negligence or wrongdoing against any individual or department is intended or implied. MP Samwad News shall not be liable for any inaccuracies arising from official sources. Corrections or clarifications are welcome and may be sent to the editorial desk.

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