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हादसे के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम? एमपी में बिजली से 391 मौतें, ऑडिट अब तक अधूरा.

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Why Does the System Wake Up Only After an Accident? 391 Electrical Deaths in MP, Safety Audit Still Incomplete.

भोपाल में सड़क किनारे बिजली के खंभे और खुले तार, जिनकी सुरक्षा जांच के लिए नगर निगम ने ऑडिट शुरू किया है
प्रदेश में 2025-26 में बिजली हादसों में 391 मौतें दर्ज हुईं। भोपाल में स्ट्रीट लाइट पोल और विद्युत संस्थापनों का ऑडिट जारी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

MP संवाद समाचार, भोपाल। विशेष संवाददाता: ऋचा तिवारी

मध्यप्रदेश में बिजली हादसों के आंकड़े विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के हवाले से बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में बिजली हादसों में 391 लोगों की मौत हुई। यह पिछले वर्ष के 310 से करीब 26 प्रतिशत अधिक है। कुल 668 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2024-25 में 619 थीं।

एक साल में 81 जानें ज्यादा

CEA की EADMS (इलेक्ट्रिकल एक्सीडेंट डेटा मॉनिटरिंग सिस्टम) के अनुसार मौतों में 81 की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में शामिल अन्य राज्यों में महाराष्ट्र (1,702), उत्तर प्रदेश (1,174), आंध्र प्रदेश (1,111), गुजरात (656) और कर्नाटक (501) में मौतें एमपी से अधिक रहीं। फिर भी एमपी की चिंता यह है कि यहां आंकड़ा घटने के बजाय तेजी से बढ़ा है।

टूटे तार, गिरते खंभे और भोपाल की एक मौत

खंभे गिरने और हाई-वोल्टेज तार टूटने से 2025-26 में 46 लोगों और 67 पशुओं की मौत दर्ज हुई। एक साल पहले यह आंकड़ा 37 लोगों और 80 पशुओं का था, यानी इंसानी जानें बढ़ीं। रिपोर्ट के अनुसार 27 सितंबर को भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में एक 30 वर्षीय अधिवक्ता की कथित तौर पर बिजली के खंभे से जुड़े जीवित तार के संपर्क में आने से मौत हुई। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति या एजेंसी के खिलाफ BNS की धारा 106(1) में मामला दर्ज किया है, और प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई है।

निगम का ऑडिट शुरू, पर प्रदेश का क्या?

घटना के बाद नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट पोल और विद्युत संस्थापनों का ऑडिट शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार कई जगह खुले या ढीले तार और असुरक्षित उपकरण मिले हैं। 391 मौतें सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण, पुराने तारों-खंभों के रखरखाव और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की मांग हैं। सवाल यह है कि क्या पूरे प्रदेश में व्यापक सुरक्षा ऑडिट होगा, या हर हादसे के बाद ही जागा जाएगा?

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Legal Disclaimer: This article is based on data attributed to the Central Electricity Authority and reports published by The Times of India and other publicly available sources at the time of publication. The figures should be verified against official records. The incident in Bhopal is under police and administrative investigation, and the circumstances described are alleged and unproven. This report does not allege negligence, liability or wrongdoing against any individual, department, agency or electricity utility. MP Samwad News shall not be liable for any inaccuracies arising from third-party sources. Corrections or clarifications are welcome and may be sent to the editorial desk.

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