नकली फार्मासिस्ट और फर्जी डॉक्टरों पर शिकंजा — 14 मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित.
Crackdown on Fake Pharmacists and Quack Doctors — Licenses of 14 Medical Stores Suspended.

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट जिले में मेडिकल स्टोर्स पर गैर-पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा दवा वितरण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) एवं पदेन उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फार्मेसी अधिनियम 1948 की धारा 42 के तहत केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं का वितरण कर सकते हैं।
उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल, भोपाल के निर्देशों के तहत मेडिकल स्टोर्स में दवा वितरण का कार्य केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही करेंगे।
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को:
- तीन माह तक का कारावास,
- दो लाख रुपये तक का जुर्माना,
- अथवा दोनों दंड एक साथ दिए जा सकते हैं।
मेडिकल स्टोर्स के निरीक्षण के लिए जारी किए गए निर्देश
कार्यालयीन आदेश के तहत जिले के औषधि निरीक्षक स्वप्निल सिंह एवं जयप्रकाश कुमार को मेडिकल स्टोर्स का नियमित निरीक्षण कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान यदि गैर-पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा वितरण पाया जाता है, तो कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और स्थानीय पुलिस के सहयोग से कार्रवाई की जाएगी।
1000 से अधिक मेडिकल स्टोर्स, केवल दो औषधि निरीक्षक
जिले में वर्तमान में लगभग 1000 से अधिक थोक एवं फुटकर औषधि विक्रय प्रतिष्ठान संचालित हैं, जबकि निरीक्षण के लिए केवल दो औषधि निरीक्षक पदस्थ हैं।
अब तक 14 मेडिकल स्टोर्स के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस 4 से 10 दिनों तक के लिए निलंबित किए जा चुके हैं।
फर्जी चिकित्सकों को दवा बिक्री रोकने के लिए विशेष दल गठित
स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में यह भी आया है कि कुछ थोक दवा विक्रेताओं द्वारा कथित रूप से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय फर्जी चिकित्सकों को सीधे दवाइयों की बिक्री की जा रही है।
इसे रोकने के लिए जिला स्तर पर एक विशेष परीक्षण दल गठित किया गया है। यह दल दवा विक्रेताओं के क्रय-विक्रय अभिलेखों और स्टॉक रजिस्टर की जांच करेगा।
जांच टीम को लेकर उठे सवालों पर विभाग का स्पष्टीकरण
सीएमएचओ ने समाचार पत्रों में प्रकाशित “नियम विरुद्ध जांच टीम बनाकर मेडिकल व्यापारियों पर दबाव” संबंधी खबरों को भ्रामक बताया है।
उन्होंने कहा कि जिले में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम 1945 के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधीन है और पंजीकृत फार्मासिस्ट की उपलब्धता एवं रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक और जनहित में है।
अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
सीएमएचओ ने जिले के सभी औषधि विक्रेताओं से अपील की है कि यदि जांच या परीक्षण के दौरान कोई व्यक्ति अवैध राशि की मांग करता है या अनावश्यक दबाव बनाता है, तो उसकी ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग सहित शिकायत कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
विभाग ने आश्वासन दिया है कि ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल
क्या जिले में सीमित निरीक्षण अमले के बावजूद मेडिकल स्टोर्स में नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो पाएगा, और क्या गैर-पंजीकृत दवा वितरण पर वास्तव में अंकुश लग सकेगा?