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FCI से निकला माल, रास्ते में हुआ कमाल! चावल प्रकरण में बढ़ते सवाल.

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Goods Left the FCI Warehouse, But Something Happened on the Way! Questions Mount in the Rice Case.

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। एफसीआई गोदाम से एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) से लदे ट्रकों के गायब होने का मामला अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 11 दिन बीत जाने के बाद भी दो ट्रकों का कोई सुराग नहीं मिलना और GPS निगरानी व्यवस्था पर उठते सवाल पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

पुलिस की जांच में बड़े स्तर पर अनियमितताओं के खुलासे की संभावना जताई जा रही है। इस मामले में एफसीआई और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है।

एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना हुए थे तीन ट्रक

जानकारी के अनुसार, नवेगांव स्थित एफसीआई गोदाम से 3 जून को छिंदवाड़ा स्थित एवीजे एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के एथेनॉल प्लांट के लिए सीएमआर चावल से लदे तीन ट्रक रवाना किए गए थे।

मामला तब चर्चा में आया जब इनमें से एक ट्रक अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय वारासिवनी की एक राइस मिल में पकड़ा गया। प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए ट्रक को जब्त किया, जिसमें लगभग 247 क्विंटल चावल लोड बताया गया।

दो ट्रकों का अब तक नहीं मिला सुराग

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाकी दो ट्रक आखिर कहां गए? 11 दिन बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका है।

इस मामले में प्रशासन ने राइस मिल संचालक, एथेनॉल प्लांट के प्रतिनिधि तथा ट्रक चालक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। पूरे प्रकरण की जांच के लिए 12 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है।

GPS व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

नियमों के अनुसार एफसीआई से निकलने वाले प्रत्येक ट्रक में GPS ट्रैकिंग सिस्टम होना अनिवार्य माना जाता है, ताकि उसकी गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित ट्रकों में GPS व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि वाहनों की निगरानी प्रक्रिया और दस्तावेजी सत्यापन में लापरवाही बरती गई हो सकती है।

यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।

क्या सिर्फ दो ट्रकों तक सीमित नहीं है मामला?

जांच से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि पिछले कुछ महीनों में एफसीआई गोदाम से एथेनॉल प्लांटों के लिए भेजे गए वाहनों, उनके रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की व्यापक जांच की जाए तो और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन रिकॉर्ड, GPS डेटा और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल से पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

जांच पर दबाव की चर्चाएं भी तेज

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मामले की जांच को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह के दौरे के दौरान भी यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।

मंत्री बोले- जांच नहीं रुकेगी

सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों द्वारा जांच की गति को प्रभावित करने की कोशिश की गई, लेकिन प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं और किसी भी जांच को रोकना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।

इस बयान के बाद यह संकेत गया कि मामले की जांच अपने निर्धारित दायरे में जारी रहेगी।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

फिलहाल पुलिस और एसआईटी जांच में जुटी हुई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है—

चावल से भरे दो ट्रक आखिर कहां गए?

और यदि कोई अनियमितता हुई है, तो उसके पीछे जिम्मेदार लोग कौन हैं?

आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।

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