RTI से डर क्यों? हाईकोर्ट ने अफसरों की मनमानी पर खींची लकीर.
Why Fear RTI? High Court Draws the Line on Bureaucratic Arbitrariness.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर ओडिशा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी विभाग या राज्य सूचना आयोग किसी नागरिक को केवल अधिक संख्या में RTI आवेदन देने के आधार पर प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि सूचना मांगना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा अधिकार है और इसे मनमाने ढंग से सीमित नहीं किया जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
मामला ओडिशा के RTI कार्यकर्ता प्रफुल्ल कुमार जेना से जुड़ा है। उन्होंने विभिन्न विभागों और राज्य सूचना आयोग में बड़ी संख्या में RTI आवेदन प्रस्तुत किए थे।
इसके बाद आयोग ने उन्हें “Habitual Applicant” बताते हुए उनकी गतिविधियों पर आपत्ति जताई। इस निर्णय को चुनौती देते हुए जेना ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
अदालत ने क्या कहा?
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि RTI अधिनियम, 2005 में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि कोई नागरिक कितने आवेदन दे सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- RTI आवेदन की संख्या पर कोई कानूनी सीमा निर्धारित नहीं है।
- सूचना आयोग या लोक सूचना अधिकारी (PIO) किसी आवेदक को “अत्यधिक आवेदनकर्ता” बताकर प्रतिबंधित नहीं कर सकते।
- यदि कोई आवेदन कानून के अपवादों (धारा 8 या 9) के अंतर्गत आता है, तो उस आवेदन को निरस्त किया जा सकता है, लेकिन आवेदक को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
सूचना का अधिकार और संविधान
फैसले में अदालत ने कहा कि सूचना तक पहुंच नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अदालत के अनुसार, सूचना मांगना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
RTI कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के लिए क्या महत्व?
RTI कार्यकर्ताओं और खोजी पत्रकारिता से जुड़े लोगों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन मामलों में सहायक हो सकता है, जहां किसी आवेदक को अधिक RTI आवेदन देने के कारण हतोत्साहित करने या आवेदन स्वीकार न करने जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि RTI का उपयोग जिम्मेदारी और जनहित के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही को मिला बल
सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में यह फैसला नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह निर्णय देशभर में RTI कानून की व्याख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।