केमिकल चावल और GST चोरी—बालाघाट में दोहरा घोटाला?
Chemical Rice and GST Evasion—A Double Scam in Balaghat?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट जिले में चावल कारोबार से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां राइस मिलर्स पर रसायनों के जरिए नकली सुगंधित चावल तैयार कर बाजार में बेचने का आरोप लगा है। इस कथित गोरखधंधे में करोड़ों रुपये के मुनाफे के साथ-साथ उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ की बात भी सामने आई है।
केमिकल से ‘सुगंधित चावल’ तैयार करने का आरोप
आरोप है कि राइस मिलर्स ने प्रोपाइलीन ग्लाइकोल (Propylene Glycol) जैसे रसायन का उपयोग कर बासमती जैसी कृत्रिम खुशबू तैयार की।
इसके बाद कालीमूंछ, जीरा, जीरा शंकर, अंबामोर, परभणी चिन्नौर और दूबराज जैसी प्रीमियम किस्मों के नाम पर नकली सुगंधित चावल बेचे गए।
देश-विदेश तक सप्लाई का दावा
सूत्रों के अनुसार, इस तरह तैयार किया गया चावल न केवल प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में बेचा गया, बल्कि विदेशों तक निर्यात किए जाने की भी बात सामने आ रही है।
15 साल पुराने गोरखधंधे का खुलासा
बताया जा रहा है कि पिछले करीब 15 वर्षों से यह अवैध कारोबार जिले में संचालित हो रहा था।
कलेक्टर मृणाल मीणा को मिली शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
छापेमारी में जब्त हुए रसायन और नमूने
कलेक्टर के निर्देश पर वारासिवनी क्षेत्र की दो राइस मिलों में छापेमारी की गई।
यहां से नकली सुगंध बनाने में उपयोग किए जाने वाले रसायन और संदिग्ध चावल के नमूने जब्त कर जांच के लिए भेजे गए।
इसके बाद पांच अन्य मिलों में भी जांच की गई, जहां से भी संदिग्ध चावल के बैग बरामद हुए।
जांच रिपोर्ट लंबित, कार्रवाई ठंडे बस्ते में?
करीब 15 दिन पहले लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है।
इस बीच, यह भी चर्चा है कि कुछ राजनेताओं के दबाव के चलते आगे की कार्रवाई धीमी पड़ गई है और अन्य मिलों की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
GST चोरी का भी बड़ा खेल
मामले में एक और बड़ा खुलासा GST टैक्स चोरी को लेकर हुआ है।
जानकारी के अनुसार, 2024 के बाद भी कई राइस मिलर्स पुराने नियमों के तहत डिस्क्लेमर छापकर ब्रांडेड चावल पर टैक्स से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अब यह छूट समाप्त हो चुकी है।
इस तरह करोड़ों रुपये के GST की चोरी की आशंका जताई जा रही है।
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ या राजनीतिक संरक्षण?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि नकली सुगंधित चावल जैसे जनस्वास्थ्य से जुड़े मामले पर अब तक जनप्रतिनिधियों की चुप्पी क्यों है?
क्या यह गोरखधंधा राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है या फिर प्रशासन पर दबाव बनाकर कार्रवाई को रोका जा रहा है?
आगे क्या? जांच या दबाव में दफन?
अब यह देखना अहम होगा कि इस बड़े खुलासे के बाद जांच आगे बढ़ती है या फिर राजनीतिक दबाव के चलते यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा।
