न डेटा, न लैब, ASHA भी नहीं! बैगा बच्चों की बीमारी पर N-JORT रिपोर्ट ने खोली पोल.
No Data, No Lab, No ASHA! N-JORT Report Exposes Glaring Gaps in Balaghat’s Health System Amid Baiga Children’s Illness.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में बैगा बच्चों के बीच बीमारी और मौतों के बाद सामने आई राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (N-JORT) की जांच रिपोर्ट ने जिले की स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच अवधि में 31 गांवों से 196 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 156 बच्चे 10 वर्ष से कम उम्र के थे। रिपोर्ट में संक्रमण के साथ कुपोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्यकर्मियों, प्रयोगशाला जांच और डेटा प्रबंधन से जुड़ी कमियां भी दर्ज की गई हैं।
196 मामलों में 156 बच्चे, 64 सैंपल में 25 खसरा पॉजिटिव
N-JORT रिपोर्ट के अनुसार 196 मामलों में 108 बच्चे 0 से 5 वर्ष और 48 बच्चे 6 से 10 वर्ष की उम्र के थे। 173 मरीजों में सर्दी-बुखार, 52 में मलेरिया और 51 में शरीर पर दाने दर्ज किए गए।
जांच किए गए 64 नमूनों में 25 खसरा पॉजिटिव मिले। वहीं 32 मरीजों की मलेरिया जांच में 27 पॉजिटिव पाए गए। 12 मरीजों में खसरा और मलेरिया दोनों संक्रमण मिले। इसके अलावा डेंगू, चिकनगुनिया और एंटरोवायरस के नमूने भी पॉजिटिव पाए गए।
N-JORT ने तीन बच्चों की मौत की विस्तृत समीक्षा में संक्रमण के साथ गंभीर कुपोषण को भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कारक के रूप में दर्ज किया है। ऐसे में सवाल केवल बीमारी के इलाज का नहीं, बल्कि बच्चों की समय रहते पहचान, निगरानी और उपचार तक पहुंच का भी है।
न जिला पब्लिक हेल्थ लैब, न साझा डेटाबेस—फिर कैसे होगी त्वरित निगरानी?
रिपोर्ट में जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट का पद रिक्त, जिला पब्लिक हेल्थ लैब का अभाव और माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद खाली होने की बात दर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार सर्विलांस, लैब, टीकाकरण, मलेरिया, पोषण और मृत्यु से जुड़े आंकड़ों के लिए साझा डेटाबेस उपलब्ध नहीं था।
अलग-अलग प्रयोगशालाओं से प्राप्त रिपोर्टों को मरीज और सैंपल आईडी के आधार पर मिलाने में भी परेशानी सामने आई। सबसे अधिक प्रभावित गांवों में से एक में एक साल से अधिक समय तक ASHA कार्यकर्ता नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।
इसी बीच जानकारी सामने आई है कि नेशनल हेल्थ मिशन की डायरेक्टर की ओर से N-JORT की जांच रिपोर्ट बालाघाट कलेक्टर को भेजी गई है, ताकि रिपोर्ट में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर कौन-कौन से ठोस कदम उठाते हैं और उन्हें लागू करने की समयसीमा क्या तय की जाती है।
N-JORT ने सक्रिय केस खोज, घर-घर निगरानी, मलेरिया की तत्काल जांच और गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान जारी रखने की सिफारिश की है।
कुपोषण और टीकाकरण के आंकड़े भी बढ़ा रहे चिंता
रिपोर्ट के अनुसार बिरसा क्षेत्र के 357 आंगनवाड़ी केंद्रों में 2,589 बच्चे SAM और MAM श्रेणी में दर्ज थे, जिनमें 604 बच्चे Severe Acute Malnutrition (SAM) श्रेणी में थे। कुछ सेक्टरों में SAM का स्तर इससे भी अधिक दर्ज किया गया।
टीकाकरण के आंकड़ों में भी अंतर सामने आया। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान बैहर में MR-1 कवरेज 51 प्रतिशत और MR-2 कवरेज 49 प्रतिशत दर्ज हुआ, जबकि बिरसा में ये क्रमशः 64.8 और 65 प्रतिशत रहे।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब राष्ट्रीय टीम की जांच में मानव संसाधन, प्रयोगशाला, डेटा प्रबंधन, टीकाकरण और जमीनी स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़ी कमियां सामने आई हैं, तो रिपोर्ट कलेक्टर तक पहुंचने के बाद इन कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी?
क्या जिला प्रशासन इन कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाएगा? क्या CMHO कार्यालय वर्तमान स्थिति और की गई कार्रवाई का सार्वजनिक विवरण देगा? और सबसे अहम—क्या अगली बार किसी गांव में बच्चों में ऐसे लक्षण उभरने से पहले स्वास्थ्य निगरानी तंत्र उन्हें पहचान पाएगा?
Legal Disclaimer: This report is based on an outbreak investigation report and information available to MP Samwad News. Findings and administrative lapses remain subject to official verification and due process.