स्वास्थ्य विभाग में ‘पेमेंट संकट’! आशा पर्यवेक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी.
Payment Crisis’ in Health Department! ASHA Supervisors Warn of Agitation.

Special Correspondent, Sharad Dhaneshwar, Lalburra, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट। लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत कार्यरत आशा पर्यवेक्षकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। महीनों से लंबित भुगतान को लेकर नाराज पर्यवेक्षकों ने 12 जून 2026 को सामूहिक आवेदन सौंपकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की मांग की है।
खंड चिकित्सा अधिकारी की अनुपस्थिति में यह आवेदन बीसीएम और बीपीएम को सौंपा गया। पर्यवेक्षकों का आरोप है कि उनसे लगातार विभागीय कार्य तो कराए जा रहे हैं, लेकिन उनके मेहनताना का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा।
फरवरी से भुगतान बंद, 2025 का बढ़ा हुआ मानदेय भी अटका
आशा पर्यवेक्षकों के अनुसार फरवरी 2026 से नियमित भुगतान लंबित है, जबकि जनवरी 2026 की राशि भी अब तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में घोषित बढ़े हुए मानदेय का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि एक कर्मचारी का लगभग 71 हजार रुपये तक बकाया है। विकासखंड के 11 पर्यवेक्षकों का कुल लंबित भुगतान 7 लाख 88 हजार 667 रुपये बताया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ, लेकिन जेब खाली
पर्यवेक्षकों ने आवेदन में बताया कि भुगतान नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों को परिवार चलाने के लिए उधार लेने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
उनका कहना है कि टीकाकरण, सर्वे, स्वास्थ्य जागरूकता और अन्य विभागीय गतिविधियों में लगातार सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समय पर पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
देरी की जिम्मेदारी तय करने की मांग
आशा पर्यवेक्षकों ने भुगतान में हो रही देरी के कारणों की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए समयबद्ध भुगतान व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी गई है।
मामले की जानकारी जिला स्तर तक भेजे जाने की बात कही गई है।
आंदोलन की चेतावनी, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
पर्यवेक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
वहीं खंड चिकित्सा अधिकारी ने बजट संबंधी समस्या का हवाला देते हुए कहा है कि इस माह के भीतर भुगतान क्लियर होने की संभावना है।
अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को उनका हक कब मिलेगा, और प्रशासन अपनी घोषणा पर कितना खरा उतर पाएगा।