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मिशन अस्पताल मामले में, CMHO घेरे में, मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने ठहराया दोषी, EOW से जांच की मांग.

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CMHO blamed in Damoh hospital scam; NHRC demands EOW probe over fake surgeries and health scheme fraud.

Damoh Mission Hospital scam exposed by NHRC, CMHO under scrutiny for fake surgeries and Ayushman scheme misuse.

NHRC Member Priyank Kanoongo exposes major scam at Damoh Mission Hospital, CMHO held accountable for licensing fraud.

In the Mission Hospital case, CMHO under scrutiny; Human Rights Commission member holds him responsible, demands investigation by EOW.

Sone Singh Thakur, Special Correspondent, Damoh, MP Samwad.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दमोह मिशन अस्पताल कांड में CMHO को दोषी ठहराते हुए, लाइसेंस घोटाले और फर्जी सर्जरी से हुई मौतों की जांच EOW से कराने की मांग की है। आयुष्मान योजना के तहत हुई धोखाधड़ी पर भी सवाल उठाए।

National Human Rights Commission member Priyank Kanoongo blamed CMHO Mukesh Jain in the Damoh Mission Hospital scandal, citing licensing irregularities, negligence, and deaths due to fake surgeries. He demanded an EOW probe and warned of strict action against all guilty officials involved. The Ayushman scheme misuse also came under fire.

MP संवाद, दमोह। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने दमोह मिशन अस्पताल में हुए फर्जीवाड़े और मौतों के मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मुकेश जैन को जिम्मेदार ठहराया है। बुधवार को वे दमोह के मानस भवन में सकल वाल्मीकि समाज के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।

लाइसेंस पर उठाए गंभीर सवाल

प्रियंक कानूनगो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस डॉक्टर के नाम पर अस्पताल को लाइसेंस जारी किया गया, वह निरीक्षण के समय मौजूद ही नहीं था। इसके बावजूद अस्पताल को लाइसेंस कैसे मिल गया? उन्होंने कहा कि यह सीधा प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का मामला है।

CMHO और प्रशासन पर डॉक्टर को बचाने का आरोप

मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने आरोप लगाया कि CMHO और स्थानीय प्रशासन फर्जी डॉक्टर अजय लाल को बचाने में लगे हैं। उन्होंने इसे एक बड़ा आर्थिक घोटाला बताया, जिसमें आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी बिलिंग कर करोड़ों की राशि निकाली गई

फर्जी डॉक्टर की सर्जरी से गई जानें

इस मामले में आरोपी डॉक्टर नरेंद्र यादव ने डेढ़ महीने में 15 हृदय सर्जरी की, जिनमें से 7 मरीजों की मौत हो गई। वह पिछले 18 वर्षों से बिना वैध योग्यता के डॉक्टर बना बैठा था और लगातार सर्जरी करता रहा।

कानूनगो ने मांगी ईओडब्ल्यू जांच

प्रियंक कानूनगो ने चेतावनी दी कि इस मामले में चाहे कोई भी अधिकारी हो, CMHO या अन्य, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से कराने की मांग की है।

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