cropped-mp-samwad-1.png

शहडोल के ऐतिहासिक विराट मंदिर में मरम्मत के लिए ASI ने लगाया ताला, लोहे का गेट लगाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही हुई बंद

0

शहडोल
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) ने शहडोल के ऐतिहासिक विराट मंदिर में ताला लगा दिया है। बाहर लोहे का गेट लगाकर श्रद्धालुओं की आवाजाही बंद की गई है। इसकी कोई सूचना पहले से नहीं दिए जाने से श्रद्धालुओं में काफी नाराजगी है। किवदंतियों में इस मंदिर को महाभारत कालीन, पांडवों के अज्ञातवास का प्रतीक माना जाता रहा है। मंदिर के गर्भगृह के द्वार पर ताला लगा दिए जाने से पूजन में व्यवधान होने लगा है।

मंदिर की दीवार जर्जर
एएसआई , जबलपुर के अधीक्षक डा. शिवकांत वाजपेयी का कहना है कि मंदिर की दीवार का एक हिस्सा जर्जर हो गया है। सुरक्षा की दृष्टि से गर्भगृह में ताला लगाया गया है। इंजीनियर सर्वे करेंगे और जल्द ही मंदिर की मरम्मत कराई जाएगी। इसके बाद गर्भगृह का ताला खोल दिया जाएगा। स्थानीय कर्मचारियों को कहा गया था कि इस संदर्भ में नोटिस चस्पा कर दें, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति न बने। यदि नोटिस नहीं लगा है तो लगवाया जाएगा। इसके अलावा सुबह पूजा के लिए गर्भगृह में पुजारी को जाने दिया जाएगा। बता दें, विराटेश्वर मंदिर सदियों से स्थानीय नागरिकों की आस्था का केंद्र रहा है।

गर्भगृह बंद किए जाने का विरोध
इधर, हिंदूवादी संगठन गर्भगृह बंद किए जाने के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत महाकोशल महामंत्री शक्ति सिंह ने कहा कि मंदिर में ताला बंद करना उचित नहीं है। विराट मंदिर में दूर-दूर से लोग भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं, लेकिन ताला लगा होने से वे बिना दर्शन व पूजा के वापस हो रहे है। इसका विरोध किया जाएगा। यदि इस ओर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन किया जाएगा।

गोलकाकी मठ के आचार्य को भेंट की निशानी
भगवान शिव को समर्पित विराट मंदिर को कलचुरी राजा युवराज देव द्वितीय ने बनवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और कलचुरी राजवंश की बेहतरीन वास्तुकलाओं में से एक है। इस मंदिर को खजुराहो के शिव मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। 70 फीट ऊंचे मंदिर को गोलकाकी मठ के आचार्य को भेंट के तौर पर बनवाया गया था।

एएसआई की देखरेख में मंदिर
मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई ) के संरक्षण में रखा गया है। गर्भगृह में एक छोटा शिवलिंग है। स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना: मंदिर के बाहर की दीवारों पर दिग्पाल वसु, शिव के विविध रूप, शिव परिवार, विष्णु अवतार, मिथुन दृश्य, और गजशार्दुल की मूर्तियां हैं। मंदिर में नृत्य मुद्रा में महावीर, शिव, और पार्वती की मूर्ति, सरस्वती, गणेश, विष्णु, नृसिंह, व्याल, कांटा निकालती सुंदर युवती, युद्धरत कलाकृतियां देखी जा सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

All Rights Reserved for MP Samwad LLP | CoverNews by AF themes.