उज्ज्वला की लौ हुई धीमी! 12 से 4 सिलेंडर तक सिमटी सब्सिडी.
Ujjwala’s Flame Burns Dimmer! LPG Subsidy Reduced from 12 Cylinders to Just 4.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, नई दिल्ली/भोपाल। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली अतिरिक्त LPG सब्सिडी के नियमों में बदलाव किया है। अब लाभार्थियों को सालाना केवल 4 LPG सिलेंडर रिफिल पर ही ₹300 प्रति सिलेंडर की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह सीमा 9 सिलेंडर थी, जबकि शुरुआती वर्षों में 12 सिलेंडर तक सब्सिडी का लाभ उपलब्ध था।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत और बढ़ते सब्सिडी बोझ को ध्यान में रखकर लिया गया है।
सरकार का तर्क: औसत खपत 4 सिलेंडर
सरकारी पक्ष के अनुसार उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत वार्षिक LPG खपत लगभग 4 सिलेंडर है। इसी आधार पर अतिरिक्त सब्सिडी को 4 रिफिल तक सीमित करने का फैसला लिया गया है।
सरकार का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव को देखते हुए सब्सिडी व्यय को संतुलित करना आवश्यक है।
उज्ज्वला: महिलाओं के सशक्तिकरण की बड़ी योजना
वर्ष 2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने की पहल के रूप में शुरू किया गया था।
इस योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन, चूल्हा और प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इसका उद्देश्य धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम करना और महिलाओं के जीवन को आसान बनाना था।
लाभार्थियों की चिंता: चार सिलेंडर से कैसे चलेगा साल?
हालांकि योजना में हुए बदलाव के बाद कई लाभार्थियों ने चिंता व्यक्त की है। बिहार की एक लाभार्थी रमा देवी (परिवर्तित नाम) का कहना है कि उनके परिवार में सालभर में 8 से 10 सिलेंडर की खपत हो जाती है।
उनके अनुसार चार सिलेंडर के बाद बाजार मूल्य पर गैस खरीदना कम आय वाले परिवारों के लिए कठिन हो सकता है।
क्या फिर बढ़ेगा पारंपरिक ईंधन का उपयोग?
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार आज भी LPG की बढ़ती कीमतों के कारण लकड़ी, गोबर और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों का उपयोग करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिफिल की लागत परिवारों की आय के मुकाबले अधिक हो जाती है, तो स्वच्छ ईंधन अपनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर असर पड़ सकता है।
आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच बहस
सरकार जहां औसत खपत के आधार पर निर्णय को उचित बता रही है, वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और उपभोक्ता समूहों का तर्क है कि बड़े परिवारों और ग्रामीण इलाकों में वास्तविक खपत कई बार औसत आंकड़ों से अधिक होती है।
यही कारण है कि सब्सिडी सीमा में कटौती को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है।
बड़ा सवाल: क्या योजना को मिलेगा नया सहारा?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ ईंधन को करोड़ों घरों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता केवल गैस कनेक्शन देने से नहीं, बल्कि नियमित और किफायती रिफिल उपलब्ध कराने से तय होगी।
अब देखना यह होगा कि सरकार भविष्य में लाभार्थियों की बढ़ती चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कोई नई राहत या संशोधन करती है या नहीं।