MP संवाद समाचार की खबर का असर! वारासिवनी में नजूल जमीन पर निर्माण रुका, SDM ने दिए जांच के आदेश.
MP Samwad News Impact! Construction Halted on Nazul Land in Waraseoni, SDM Orders Investigation.

MP संवाद समाचार | वारासिवनी, बालाघाट। आनंद ताम्रकार |
वारासिवनी नगर में शासकीय नजूल भूमि पर कथित अतिक्रमण और दुकानों के निर्माण का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर पहुंच गया है। MP संवाद समाचार द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद वारासिवनी के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। जारी शासकीय दस्तावेजों के अनुसार, कृषि उपज मंडी के सामने कटंगी मार्ग स्थित नजूल भूमि पर निर्माण कार्य को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। इस घटनाक्रम को शासकीय भूमि के संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त शासकीय दस्तावेजों के अनुसार, वारासिवनी कृषि उपज मंडी के सामने कटंगी मार्ग पर खसरा नजूल शीट क्रमांक 9डी, प्लॉट नंबर 6 की लगभग 5,820 वर्गमीटर भूमि को शासकीय नजूल भूमि के रूप में दर्ज बताया गया है।
आवेदन में आरोप लगाया गया था कि इस भूमि पर कुछ लोगों द्वारा पुरानी दुकानों को तोड़कर नई दुकानें बनाई जा रही हैं। साथ ही, निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति और भूमि से संबंधित दस्तावेजों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए थे।
पत्रकार आनंद ताम्रकार द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत आवेदन के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), वारासिवनी ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
SDM ने निर्माण पर लगाई रोक, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
19 अक्टूबर 2026 को जारी स्थगन आदेश में अनुविभागीय अधिकारी ने संबंधित भूमि पर नई दुकानें बनाने के कार्य को आगामी आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है।
आदेश में तहसीलदार वारासिवनी को आवश्यक सूचना और पालनार्थ कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। इसके साथ ही, संबंधित पक्षों से भूमि के पट्टा, लीज, सीमांकन और निर्माण की अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।
प्रशासन ने संबंधित पक्षों को 21 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख है कि निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है।
दूसरे शासकीय पत्र में संबंधित राजस्व अधिकारियों को तीन दिन के भीतर संयुक्त जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में कथित कब्जाधारियों के नाम, भूमि का क्षेत्रफल, पट्टा या लीज की स्थिति, उसकी अवधि और वर्तमान कब्जे सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जानी हैं।
जांच से स्पष्ट होगी जमीन की वास्तविक स्थिति
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित भूमि पर निर्माण के लिए वैध अनुमति ली गई थी या नहीं और भूमि के उपयोग अथवा आवंटन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
प्रशासनिक जांच में इन बिंदुओं की पुष्टि होने के बाद ही कथित अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, निर्माण पर रोक और दस्तावेजों की मांग को मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
MP संवाद समाचार इस मामले में जांच की प्रगति, प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर नजर बनाए रखेगा। शासकीय भूमि का संरक्षण केवल राजस्व विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और नागरिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी है।
अब देखना यह होगा कि संयुक्त जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।
Disclaimer – This news report is based on available official government documents and the facts stated in the application received. The allegations of illegal encroachment on the land remain subject to the relevant administrative investigation and the findings of the competent authority. The response of the concerned parties will also be given due coverage in the news report once received.
