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Balaghat: Questions Over Degree, FIR Against Doctor.

बालाघाट के बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फर्जी डिग्री के आरोप में डॉक्टर पर एफआईआर
बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जहां डॉक्टर पर कथित फर्जी डिग्री से सेवा पाने का आरोप है (प्रतीकात्मक फोटो)

MP संवाद समाचार | बालाघाट/भोपाल
विशेष संवाददाता: आनंद तामरकर.

बालाघाट। जिन हाथों पर मरीजों की जान बचाने का भरोसा था, उन्हीं की डिग्री अब सवालों के घेरे में है। बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ रहे डॉ. सुनील सिंह के विरुद्ध कथित फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी पाने के आरोप में बिरसा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में डिग्री फर्जी पाई गई

मध्यप्रदेश स्वास्थ्य विभाग की जांच में डॉ. सिंह की एमबीबीएस डिग्री फर्जी पाई गई। विभाग ने 9 अक्टूबर को जारी आदेश में उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश के पालन में बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. मारन ने 10 अक्टूबर को थाने में शिकायत दर्ज कराई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया ने एफआईआर की पुष्टि की है।

10 साल तक मरीजों के बीच, रीवा विश्वविद्यालय की डिग्री पर सवाल

बताया गया है कि डॉ. सिंह पिछले करीब 10 वर्षों से बिरसा में सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने एमबीबीएस की डिग्री अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से प्राप्त की थी, जो जांच में फर्जी पाई गई। सवाल यह है कि इतने वर्षों तक दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं हुआ, और इस दौरान जिन मरीजों का इलाज हुआ, उनकी सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है?

विदिशा में हमनाम डॉक्टर, जांच का नया मोड़

जानकारी के अनुसार विदिशा में भी इसी नाम से एक डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि केवल नाम की समानता के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। दोनों के बीच कोई संबंध है या नहीं, यह पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच का विषय है।

MP संवाद समाचार की नजर: यह मामला केवल एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती और सत्यापन व्यवस्था का है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या सामने आता है, और विभाग अन्य कर्मचारियों की डिग्रियों की पड़ताल करेगा या नहीं।

Legal Disclaimer: This article is based on information from official sources and available reports and is published in the public interest. The allegations against the named individual are the subject of an FIR and an ongoing investigation; they have not been proven in a court of law, and the person is presumed innocent until proven guilty. The mention of another doctor with a similar name is not an allegation against that person. MP Samwad News (www.mpsamwad.com) does not intend to defame any individual or institution. Corrections or the concerned party’s version may be sent to the editorial team and will be published promptly.

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