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वारासिवनी में सरकारी जमीन की खुली लूट: 96 प्लॉट, 346 कब्जेदार, प्रशासन खामोश.

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Open Plunder of Government Land in Warasivni: 96 Plots, 346 Encroachers, Administration Silent.

वारासिवनी में नजूल की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से बनी दुकानें और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स
वारासिवनी में नजूल भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप, प्रशासन की जांच जारी। (फोटो: MP संवाद)

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल | विशेष संवाददाता: आनंद तामरकर

बालाघाट जिले के वारासिवनी में सरकारी जमीनों पर कब्जा कर निर्माण कराने और फिर उन्हें लाखों-करोड़ों में बेचने का खेल बरसों से जारी है। शिकायतें अफसरों तक पहुंचीं, सीएम हेल्पलाइन में भी दर्ज हुईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलें घूमती रहीं। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की सांठगांठ से भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

RTI में खुलासा: 96 प्लॉट, 346 अवैध कब्जे

ताजा मामला वारासिवनी नगर का है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने सूचना के अधिकार के तहत बताया कि राजस्व विभाग के सर्वे में शासकीय नजूल भूमि के 96 प्लॉट ऐसे मिले, जिनका न निर्धारण हुआ और न ही किसी के पक्ष में अंतरण। इन प्लॉटों पर 346 लोगों का अवैध कब्जा पाया गया। हैरानी यह है कि आज तक इन्हें हटाने की कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बिना अनुमति लीज, फिर बहुमंजिला दुकानें

आरोप है कि नगर पालिका परिषद और कृषि उपज मंडी वारासिवनी ने शासन की अनुमति के बिना नजूल भूमि एक वर्ष की अस्थायी लीज पर बांट दी। लीजधारियों ने निर्माण की अनुमति लिए बिना बहुमंजिला दुकानें और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े कर लिए। नजूल शीट क्रमांक 9डी के प्लॉट नंबर 64 की जमीन, जो अब किसी और के नाम दर्ज है, कथित तौर पर 80 लाख और 1 करोड़ 30 लाख रुपये में बेची गई।

इसी शीट के एक और प्लॉट पर मंडी ने 19 लोगों को अस्थायी लीज दी। उन्होंने जमीन किसी और को बेच दी, खरीदार ने पक्का निर्माण किया और फिर आगे बेच दिया। नतीजा यह कि मंडी के दस्तावेजों में नाम किसी का है और कब्जा किसी और का।

नहरें भी नहीं बचीं, SDM ने दिए जांच के आदेश

जल संसाधन विभाग की जिन नहरों से कभी सिंचाई होती थी, उनकी जमीन पर भी कब्जे के आरोप हैं। पूरे जिले में सरकारी जमीन सिमटती जा रही है और प्रशासन मौन है। अब SDM वारासिवनी श्रीश प्यासी ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। सवाल यही है कि क्या जांच कब्जे हटाएगी, या यह भी फाइलों में दफन हो जाएगी?

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Disclaimer: The contents of this article are based on information obtained through RTI and other sources, and on allegations made by complainants. MP Samwad News does not claim that any person or institution named or implied is guilty of any offence. All individuals and bodies are presumed innocent until proven guilty in a court of law. Readers are advised to verify the facts independently. MP Samwad News bears no liability for any action taken on the basis of this report. Those named are welcome to share their version, which will be published.

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