MP के 9 BAMS कॉलेजों पर NCISM की कार्रवाई, अनुमति पर संकट.
MP Ayurvedic Colleges: NCISM Action Against 9 BAMS Colleges in Madhya Pradesh, Permission Under Scrutiny.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट के सरदार पटेल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल से जुड़ी विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सामने आई है। राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज को BAMS की 100 सीटों की अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिकॉर्ड में इसे “Denial of Permission” की श्रेणी से जोड़ा गया है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि “Denial of Permission” को सीधे स्थायी मान्यता रद्द होना नहीं कहा जा सकता। NCISM के रिकॉर्ड के अनुसार कॉलेज को इससे पहले शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए BAMS की 100 सीटों की अनुमति प्राप्त थी।
100 BAMS सीटों की अनुमति नहीं, विद्यार्थियों के भविष्य पर सवाल
2026-27 सत्र में प्रवेश लेने वाले या प्रवेश की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। यदि किसी कॉलेज को संबंधित शैक्षणिक सत्र के लिए नियामक अनुमति नहीं मिलती है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि वहां प्रवेश प्रक्रिया, सीटों की वैधता और विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता को लेकर क्या स्थिति होगी।
ऐसे में विद्यार्थियों और अभिभावकों को केवल कॉलेज के दावों पर निर्भर रहने के बजाय NCISM की नवीनतम अनुमति, संबंधित विश्वविद्यालय की संबद्धता और AYUSH काउंसलिंग रिकॉर्ड की स्थिति देखना जरूरी होगा।
फैकल्टी व्यवस्था पर भी उठे गंभीर सवाल
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कॉलेज की फैकल्टी व्यवस्था से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कॉलेज से जुड़े 39 फैकल्टी के Teacher Codes पर एक वर्ष के लिए कार्रवाई की गई थी। यदि नियामक जांच में शिक्षकों की उपलब्धता, नियुक्ति अथवा वास्तविक उपस्थिति से संबंधित अनियमितताएं सामने आई हों, तो यह संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हालांकि ऐसे आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले NCISM के संबंधित आदेश और कॉलेज का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।
MP के कई आयुर्वेदिक कॉलेज भी कार्रवाई की सूची में
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के कई आयुर्वेदिक कॉलेज NCISM की विभिन्न अनुमति संबंधी कार्रवाइयों के दायरे में आए हैं। इनमें भोपाल के कई संस्थान तथा बालाघाट, बैतूल, रायसेन और सीहोर के कॉलेज शामिल बताए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2026-27 में Denial of Permission वाले कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए नियामक और विश्वविद्यालय स्तर पर क्या व्यवस्था होगी? क्या प्रभावित विद्यार्थियों को वैकल्पिक विकल्प, सीट समायोजन या अन्य कोई राहत मिलेगी?
इस पूरे मामले में NCISM, AYUSH विभाग, संबंधित विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रबंधन को विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही 2026-27 की अनुमति से जुड़े आदेश और फैकल्टी संबंधी कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
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