बाहर से आए इन्फ्लुएंसर्स पर बालाघाट के पत्रकारों का विरोध, सरकारी खबरों के बहिष्कार की चेतावनी.
Balaghat Journalists Protest Against Outside Influencers, Warn of Boycott of Government News.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट के आदिवासी अंचल में बच्चों की मौत और बीमारी को लेकर चल रही बहस के बीच अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिले के पत्रकारों ने बाहर से आए कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के कथित व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए उनकी कार्यशैली की निंदा की है। पत्रकारों का आरोप है कि शनिवार को सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके के साथ बातचीत के दौरान जिस तरह सवाल-जवाब किए गए, उससे बालाघाट और स्थानीय पत्रकारिता की छवि प्रभावित हुई।
पत्रकारों ने रविवार को बैठक कर इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताई और शासन-प्रशासन से मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की।
मैदानी रिपोर्टिंग के बीच बाहर से आए इन्फ्लुएंसर्स पर सवाल
बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौत और लगातार बीमारी की खबरों के बीच स्थानीय पत्रकार लगातार मैदानी स्थिति सामने लाते रहे हैं। दूसरी ओर, जिले में बाहर से आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की गतिविधियों को लेकर स्थानीय पत्रकारों में असंतोष सामने आया है।
पत्रकारों का कहना है कि सरकार या प्रशासन अपनी योजनाओं और कामकाज की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाना चाहता है तो यह उसका अधिकार है, लेकिन स्थानीय पत्रकारों की विश्वसनीयता और छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इन्फ्लुएंसर्स को किस उद्देश्य से और किस स्तर पर बुलाया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
पत्रकार बोले—बाहर से लोगों को बुलाएं, लेकिन स्थानीय मीडिया को बदनाम न करें
बैठक में वरिष्ठ पत्रकार आनंद ताम्रकर, अशोक मोटवानी, रफी अंसारी, शशांक माहुले, रूपेश श्रीवास्तव और आशीष शर्मा सहित अन्य पत्रकार मौजूद रहे। बैठक में बाहर से आए जनसंपर्क अधिकारी माथन सिंह उईके और जिला जनसंपर्क अधिकारी अनिल पटले की मौजूदगी भी बताई गई।
पत्रकारों ने जनसंपर्क अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सरकार अपनी योजनाओं के प्रचार के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को बुलाती है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनके माध्यम से बालाघाट और स्थानीय पत्रकारों की छवि धूमिल नहीं होनी चाहिए।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर पत्रकारों को आपस में बांटने या लड़ाने का प्रयास किया गया तो उसका विरोध किया जाएगा।
माफी नहीं तो सरकारी खबरों के बहिष्कार की चेतावनी
बैठक में पत्रकारों ने कथित व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि स्थानीय पत्रकारों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर स्पष्टीकरण या माफी नहीं मांगी गई, तो पत्रकार संगठन आगे सरकारी खबरों के बहिष्कार जैसे कदम पर विचार कर सकते हैं।
विवाद का केंद्र शनिवार को अभिजीत दीपके के साथ हुई कथित बातचीत भी है। पत्रकारों का आरोप है कि इन्फ्लुएंसर्स ने उनसे जवाब लिए बिना लगातार सवाल किए और उनका अपमान किया। हालांकि, इस घटनाक्रम का दूसरा पक्ष और संबंधित इन्फ्लुएंसर्स का विस्तृत पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
अब बड़ा सवाल यह है कि सरकार और प्रशासन स्थानीय पत्रकारों तथा नए डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बीच बेहतर समन्वय कैसे स्थापित करेंगे? बालाघाट जैसे संवेदनशील मामले में जहां मैदानी रिपोर्टिंग और प्रशासनिक दावों के बीच पहले से सवाल मौजूद हैं, वहां संवाद और पारदर्शिता ही विवाद को बढ़ने से रोक सकती है।
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