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जूते हाथ में, कीचड़ में नंगे पैर स्कूल! दमोह के बरखेड़ा थोबन में सड़क बनी बच्चों की परीक्षा.

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Shoes in Their Hands, Barefoot Through Mud to School! The Road in Damoh’s Barkheda Thobon Has Become a Daily Test for Children.

दमोह के बरखेड़ा थोबन में कीचड़ भरे रास्ते से नंगे पैर स्कूल जाते बच्चे
जूते हाथ में लेकर कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाते बरखेड़ा थोबन के बच्चे, पक्की सड़क की मांग।

Special Correspondent, Rahul Singh Rajpoot, Damoh, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, दमोह/भोपाल दमोह बारिश का मौसम आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की तस्वीरें सामने आने लगती हैं। पटेरा तहसील की ग्राम पंचायत हरपालपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरखेड़ा थोबन से सामने आया एक वायरल वीडियो ग्रामीण सड़क व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे पीठ पर स्कूल बैग टांगे और हाथों में जूते-चप्पल लेकर घुटनों तक कीचड़ से भरे रास्ते पर नंगे पैर स्कूल जाते दिखाई दे रहे हैं। बारिश के बाद कच्चा रास्ता इतना खराब हो गया है कि बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना रोजाना किसी चुनौती से कम नहीं है।

जूते हाथ में, बस्ता पीठ पर और पैरों के नीचे कीचड़

बरखेड़ा थोबन में सड़क की बदहाली का सबसे बड़ा खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। वायरल वीडियो में बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। कई बच्चों ने अपने जूते-चप्पल हाथों में पकड़ रखे हैं, ताकि वे कीचड़ में खराब न हों।

यह तस्वीर केवल एक खराब सड़क की कहानी नहीं, बल्कि उन बच्चों की परेशानी भी दिखाती है जिन्हें शिक्षा हासिल करने के लिए रोजाना इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। बारिश के दौरान फिसलन और गहरे कीचड़ के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

लंबे समय से सड़क की मांग, ग्रामीणों का आरोप—सुनवाई नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से पक्की सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में रास्ते की स्थिति और भी खराब हो जाती है और बच्चों, बुजुर्गों तथा अन्य ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है।

सवाल यह है कि जब ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं, तो संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत स्तर पर इस समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?

सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, बच्चों की सुरक्षा और भविष्य का सवाल

गांव की सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होती। यह बच्चों की स्कूल तक पहुंच, ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़ी होती है।

बरखेड़ा थोबन की तस्वीर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक सीधा सवाल है—क्या बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए हर बारिश में कीचड़ से जूझना ही पड़ेगा?

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराने और बरसात में आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। अब देखना होगा कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिम्मेदार विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है।

Legal Disclaimer: This report is based on a viral video and statements attributed to local residents. The reported conditions and administrative responsibility remain subject to official verification.

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