बारिश आई, विकास बह गया! कटनी में स्कूल की राह पर कीचड़ ही कीचड़.
Rain Arrives, Development Washes Away! Mud Everywhere on the Road to School in Katni.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड की ग्राम पंचायत सिंहुड़ी बाकल में सड़क की बदहाल स्थिति ने शिक्षा और ग्रामीण विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरसात शुरू होते ही उचित मूल्य की दुकान से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तक जाने वाला करीब एक किलोमीटर लंबा मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सोमवार को परेशान ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने कीचड़ से भरे सड़क मार्ग पर धान की रोपाई कर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखें और वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान करें।
15 साल से सड़क की मांग, बारिश में रास्ता बना ‘दलदल’
ग्रामीणों के अनुसार, करीब 15 वर्षों से एक किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। पंचायत से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक कई बार आवेदन और शिकायतें दी गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह कीचड़ जमा होने से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने विद्यार्थियों को साइकिलें उपलब्ध कराई हैं, लेकिन सड़क की स्थिति ऐसी है कि साइकिल चलाना भी जोखिम भरा हो गया है। फिसलने से बच्चों के कपड़े कीचड़ से खराब हो जाते हैं और कई बार गिरने का खतरा बना रहता है।
जिस रास्ते से बच्चों को स्कूल पहुंचना चाहिए, वही रास्ता अब उनकी पढ़ाई में बाधा बनता दिखाई दे रहा है।
बच्चों का दर्द—‘ऐसे ही रहा तो स्कूल जाना छोड़ देंगे’
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सड़क की बदहाली का सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ने लगा है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बच्चे कीचड़ और जलभराव के कारण स्कूल जाने से कतराने लगे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचते-पहुंचते कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं। पैदल चलने पर भी घुटनों तक कीचड़ में फंसने की स्थिति बन जाती है। ऐसे में स्कूल जाना उनके लिए परेशानी और जोखिम दोनों बन गया है।
कुछ विद्यार्थियों ने चिंता जताई कि यदि सड़क की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो वे स्कूल जाना तक छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।
यह स्थिति केवल सड़क की समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के शिक्षा के अधिकार और सुरक्षित आवागमन से जुड़ा गंभीर विषय है।
धान रोपकर ग्रामीणों ने पूछा—विकास की तस्वीर अधिकारी कब देखेंगे?
सड़क की हालत से नाराज ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने सोमवार को कीचड़ भरे मार्ग पर धान रोपकर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। उनका कहना था कि जब सड़क पर वाहन चलना मुश्किल है तो यहां धान की रोपाई ही क्यों न कर दी जाए?
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की कि वे स्वयं मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति देखें, ताकि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर सामने आ सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
SDM बोले—पहले मुरम डलवाएंगे, फिर स्थायी समाधान
मामले को लेकर बहोरीबंद SDM प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सड़क किस विभाग के अंतर्गत आती है, इसकी जानकारी ली जा रही है। फिलहाल बच्चों और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए सड़क पर मुरम डलवाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और समस्या का तीन से चार दिन के भीतर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, सवाल यह है कि यदि करीब 15 वर्षों से सड़क की मांग लंबित है, तो क्या अस्थायी रूप से मुरम डालना इसका स्थायी समाधान होगा?
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—उन्हें केवल बारिश के मौसम में राहत नहीं, बल्कि एक ऐसी सड़क चाहिए जिस पर विद्यार्थी पूरे साल सुरक्षित होकर स्कूल जा सकें।
अब देखना होगा कि प्रशासन का आश्वासन वास्तव में जमीन पर कब उतरता है और सिंहुड़ी बाकल के विद्यार्थियों को कीचड़ से निकलकर सुरक्षित रास्ते से स्कूल पहुंचने का अधिकार कब मिलता है।
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