कुपोषण, बीमारी या सिस्टम की चूक? दक्षिण बैहर में दो और बच्चों की मौत.
Malnutrition, Illness or System Failure? Two More Children Die in South Baiga, Balaghat.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले के दक्षिण बैहर क्षेत्र के बिरसा विकासखंड के आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में कुपोषण, समय पर टीकाकरण नहीं होने, तेज बुखार, मलेरिया, चेचक जैसे संक्रमण और त्वचा संबंधी बीमारियों से बच्चों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आती रही है। इसी बीच 16 और 17 अगस्त को दो अलग-अलग गांवों में दो बच्चों की मौत की सूचना सामने आई है।
इन दो नई मौतों के बाद क्षेत्र में बच्चों की मौत का आंकड़ा 22 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, प्रत्येक मृत्यु के वास्तविक चिकित्सकीय कारण की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और मृत्यु प्रमाण संबंधी दस्तावेजों से ही हो सकती है।
दो दिन, दो मौतें—दक्षिण बैहर में फिर बढ़ी चिंता
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सोनगुड्डा के ग्राम पनबाही निवासी रनजीत पिता फागू मरावी, उम्र 10 वर्ष, को अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई। परिजन उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसी तरह बिरसा विकासखंड की लालपुर पंचायत के धामनगांव निवासी गौरी पिता मंगलू कुसरे, उम्र 1 वर्ष 7 माह, की 17 अगस्त की सुबह मौत हो गई। बताया गया कि बच्ची पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थी।
दोनों मामलों में मौत के कारणों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि अभी जरूरी है। यदि क्षेत्र में लगातार बच्चों की मौत हो रही है, तो प्रत्येक मामले की मेडिकल हिस्ट्री, उपचार, जांच रिपोर्ट और संभावित कारणों की समीक्षा किया जाना बेहद जरूरी है।
सिर्फ आंकड़ा सामने आने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यह पता लगाना होगा कि बच्चों को बीमारी की स्थिति में समय पर उपचार मिला या नहीं और गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों तक समय पर पहुंचाया गया या नहीं।
22 मौतों के दावे के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
बैहर क्षेत्र के विधायक संजय उइके ने इन नई मौतों की पुष्टि किए जाने की जानकारी सामने आई है। विधायक के अनुसार प्रशासन की पहल पर प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार काम कर रही हैं। दवाइयों और पोषण आहार का वितरण भी किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में तेज बारिश के बावजूद स्वास्थ्य कार्यकर्ता और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
इसके बावजूद कई सवाल जवाब मांग रहे हैं—क्या सभी बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच हो रही थी? क्या कुपोषित बच्चों की पहचान और निगरानी नियमित थी? क्या टीकाकरण की स्थिति का गांववार सत्यापन किया गया? क्या गंभीर रूप से बीमार बच्चों को समय रहते रेफर किया गया?
अगर निगरानी लगातार जारी थी, तो बीमारी गंभीर होने से पहले बच्चों की पहचान और उपचार क्यों नहीं हो पाया?
इन सवालों के जवाब सरकारी दावों से नहीं, बल्कि जमीनी रिकॉर्ड और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से सामने आने चाहिए।
चार महीने राशन नहीं मिला तो कुपोषण पर कैसे लगेगी लगाम?
इस पूरे मामले में खाद्यान्न वितरण को लेकर सामने आई जानकारी भी चिंताजनक है। विधायक के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में पिछले चार महीने से राशन का वितरण नहीं हुआ था, हालांकि अब राशन वितरण शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।
यदि वास्तव में पात्र परिवारों को चार महीने तक नियमित राशन नहीं मिला, तो यह केवल वितरण व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है।
जिला प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राशन वितरण में देरी क्यों हुई, कितने परिवार प्रभावित हुए और वर्तमान में कितने परिवारों को नियमित राशन मिल रहा है।
दक्षिण बैहर में लगातार सामने आ रही बच्चों की मौतों के बीच अब जरूरत केवल राहत और दवाइयां बांटने की नहीं, बल्कि हर मृत्यु के कारण की पारदर्शी जांच, पोषण व्यवस्था की समीक्षा, टीकाकरण की स्थिति का ऑडिट और गांव स्तर पर स्वास्थ्य निगरानी मजबूत करने की है।
22 मौतों के दावे की आधिकारिक पुष्टि और प्रत्येक मृत्यु के कारण की स्पष्ट जानकारी ही बताएगी कि दक्षिण बैहर की यह त्रासदी बीमारी, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी या कई कारणों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है।
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