मेडिकल कॉलेज नहीं मिला, क्या लॉ कॉलेज भी सपना ही रहेगा?
Medical College Never Came, Will the Law College Also Remain Just a Dream?

MP संवाद समाचार, कटनी.
Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.
कटनी के युवाओं ने एक बार फिर क्षेत्र के सांसद वी.डी. शर्मा के सामने एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। इस बार मुद्दा सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि जिले में एक सरकारी लॉ कॉलेज की स्थापना का है।
स्थानीय युवाओं और छात्रों का कहना है कि वर्षों से उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर मांगें उठती रही हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। ऐसे में अब सरकारी विधि महाविद्यालय की मांग जोर पकड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज नहीं मिला, अब लॉ कॉलेज की उम्मीद
कटनी में पहले भी मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी परियोजनाओं की मांग उठती रही है। लेकिन अब छात्रों ने अपेक्षाकृत कम संसाधनों में पूरी हो सकने वाली मांग को प्राथमिकता दी है।
युवाओं का तर्क है कि यदि जिले में सरकारी लॉ कॉलेज शुरू हो जाए तो हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें कानून की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
जनसुनवाई में उठा मुद्दा
हाल ही में आयोजित जनसुनवाई में विधि छात्र आयुष तोमर ने कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपकर सरकारी लॉ कॉलेज की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के अनेक छात्र केवल इसलिए एलएलबी की पढ़ाई नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें दूसरे शहरों में जाना पड़ता है या निजी संस्थानों की भारी फीस वहन करनी पड़ती है।
सांसद तक पहुंची मांग
युवा अधिवक्ता यश खरे ने खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा से मुलाकात कर शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी में तीन वर्षीय एलएलबी और पांच वर्षीय बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम शुरू कराने की मांग रखी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सांसद इस विषय को उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाएंगे।
न्यायिक केंद्र, फिर भी लॉ कॉलेज नहीं
कटनी आज एक महत्वपूर्ण न्यायिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। जिले में न्यायालय, बड़ी संख्या में अधिवक्ता और लगातार बढ़ती विधिक गतिविधियां मौजूद हैं।
इसके बावजूद सरकारी स्तर पर विधि शिक्षा की सुविधा उपलब्ध न होना छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तिलक कॉलेज में विधि पाठ्यक्रम शुरू किए जाते हैं, तो इससे हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
- गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का खर्च कम होगा।
- स्थानीय स्तर पर विधि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
- जिले को भविष्य के अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और विधि विशेषज्ञ मिल सकेंगे।
- छात्र पलायन में कमी आएगी।
बड़ा सवाल: कमी संसाधनों की या इच्छाशक्ति की?
छात्रों का सवाल सीधा है—जब भवन, कॉलेज, विद्यार्थी और जरूरत सभी मौजूद हैं, तो सरकारी लॉ कॉलेज की स्थापना में देरी क्यों?
युवाओं का मानना है कि अब यह केवल शिक्षा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि अवसरों की समानता और जिले के भविष्य का प्रश्न बन चुका है।
जनसुनवाई से लेकर सांसद कार्यालय तक पहुंची यह मांग संकेत दे रही है कि कटनी का युवा अब अपने शैक्षणिक अधिकारों को लेकर मुखर हो चुका है।
उसकी मांग साफ है—
“कानून की पढ़ाई के लिए अब पलायन नहीं, कटनी में ही सरकारी लॉ कॉलेज चाहिए।”