UP में राहत, MP में वसूली! आखिर किसके साथ है सरकार?
Relief in Uttar Pradesh, Recovery in Madhya Pradesh! Whose Side Is the Government On?

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
भोपाल, मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर महंगाई का एक और बोझ पड़ता दिखाई दे रहा है। अप्रैल, मई और जून 2026 में फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी के बाद अब उपभोक्ता संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर ने मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बढ़े हुए फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए।
उपभोक्ता संगठनों का आरोप है कि पहले ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे आम लोगों पर अब बिजली कंपनियां अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही हैं।
मार्च में शून्य, अप्रैल में सीधा झटका!
मंच द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार मार्च 2026 में फ्यूल सरचार्ज शून्य प्रतिशत था। लेकिन अप्रैल में इसे बढ़ाकर 5.36 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि मई और जून में 3.91 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लागू किया गया।
इसके साथ ही बिजली दरों में भी 4.8 प्रतिशत की वृद्धि लागू होने से उपभोक्ताओं के मासिक बिलों में अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश ने लगाई रोक, मध्यप्रदेश क्यों चुप?
ज्ञापन में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बढ़े हुए फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर रोक लगाते हुए बिजली कंपनियों से जवाब तलब किया है।
उपभोक्ता मंच का कहना है कि जब उत्तर प्रदेश में राहत दी जा सकती है, तो मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को वही सुविधा क्यों नहीं मिल सकती?
गरीब और मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
बिजली बिल में बढ़े हुए फ्यूल सरचार्ज का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों के बीच बिजली का अतिरिक्त भार आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।
आयोग और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने ई-मेल के माध्यम से मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव को ज्ञापन भेजकर मई-जून के फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।
साथ ही ऊर्जा विभाग और राज्य सरकार से भी हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं को राहत देने की अपील की गई है।
बड़ा सवाल: बिजली कंपनियों का लाभ या जनता की राहत?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- जब उत्तर प्रदेश में राहत मिल सकती है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं?
- क्या फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर पुनर्विचार होगा?
- बढ़ती महंगाई के बीच उपभोक्ताओं को राहत कौन देगा?
- क्या सरकार जनता के साथ खड़ी होगी या बिजली कंपनियों के साथ?
मध्यप्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ता अब इस सवाल का जवाब चाहते हैं।