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पत्रकारिता या प्रोपेगेंडा? हरिशंकर पाराशर ने खोली पोल.

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Journalism or propaganda? Harishankar Parashar exposes the truth.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, रायपुर/भोपाल। स्वतंत्र लेखक एवं सामाजिक टिप्पणीकार हरिशंकर पाराशर ने वर्तमान मीडिया की भूमिका पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि आज की पत्रकारिता सत्य से दूर भाग रही है और झूठ को बढ़ावा दे रही है, जबकि आम जनता को “जनहित की पत्रकारिता” का भ्रम दिया जा रहा है।

“चौथा स्तंभ या झूठ की दीवार?”

श्री पाराशर ने अपने लेख में कहा,“मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन अब यह सत्य के बजाय झूठ की दीवार बनता जा रहा है। जो मीडिया सच से भागती है, वही खुद को जनहित का रक्षक बताने में लगी है—यह सबसे बड़ा भ्रम है।”

कॉर्पोरेट, राजनीति और TRP के जाल में मीडिया

उन्होंने आरोप लगाया कि आज अधिकांश मीडिया संस्थान कॉर्पोरेट घरानों, राजनीतिक दलों और TRP के दबाव में काम कर रहे हैं। खबरों की जगह अब सनसनीखेज कंटेंट, फेक न्यूज और क्लिकबेट ने ले ली है।

“सत्य नहीं, चयनित सच परोस रहा मीडिया”

पाराशर के अनुसार, जब भी कोई बड़ा मुद्दा सामने आता है, तो मीडिया उसे निष्पक्ष रूप से नहीं दिखाता, बल्कि अपने हितों के अनुसार “चयनित सच” प्रस्तुत करता है। जो तथ्य असुविधाजनक होते हैं, उन्हें दबा दिया जाता है।

जनता को चेतावनी: “भ्रम के जाल से सावधान रहें”

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे टीवी बहसों, सोशल मीडिया के वायरल वीडियो और प्रायोजित खबरों से सावधान रहें।
“जो खुद को जनहित का योद्धा बताते हैं, वे अक्सर अपने हित साध रहे होते हैं,” उन्होंने कहा।

जनता को चेतावनी: “भ्रम के जाल से सावधान रहें”

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे टीवी बहसों, सोशल मीडिया के वायरल वीडियो और प्रायोजित खबरों से सावधान रहें।
“जो खुद को जनहित का योद्धा बताते हैं, वे अक्सर अपने हित साध रहे होते हैं,” उन्होंने कहा।

“सत्य को बना दिया गया राय”—सबसे खतरनाक ट्रेंड

लेखक ने कहा कि आज की पत्रकारिता में सत्य को राय में बदल दिया गया है। एक ही घटना पर अलग-अलग मीडिया संस्थान बिल्कुल विपरीत कथाएं पेश करते हैं, जिससे आम जनता भ्रमित और विभाजित हो जाती है।

निडर पत्रकारिता पर संकट

उन्होंने यह भी कहा कि जो पत्रकार सच उजागर करने की कोशिश करते हैं, उन्हें ट्रोलिंग, आरोप और दबाव का सामना करना पड़ता है। वहीं, बाकी लोग “जनहित” के नाम पर दिखावा करते रहते हैं।

जनता से सवाल पूछने की अपील

पाराशर ने नागरिकों को सजग रहने की सलाह देते हुए तीन अहम सवाल उठाने को कहा:

  • यह खबर किसके हित में है?
  • इसका स्रोत क्या है?
  • पूरा सच क्यों नहीं बताया जा रहा?

“पत्रकारिता या झूठ का व्यापार?”

हरिशंकर पाराशर ने चेतावनी दी कि अगर जनता अब भी सतर्क नहीं हुई, तो एक दिन सच्चाई पूरी तरह दबा दी जाएगी।
“सच्ची पत्रकारिता वही है जो हर हाल में सच को सामने लाए—वरना यह सिर्फ झूठ का व्यापार बनकर रह जाएगी,” उन्होंने कहा।

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