63 साल बाद फिर गूंजी ‘रणभेरी’, कटनी के कवियों की देशभक्ति की विरासत.
63 Years Later, ‘Ranbheri’ Echoes Again: Katni Poets’ Legacy of Patriotism Lives On.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। देश के कवियों और शिक्षकों ने सदैव समाज में चेतना और दिशा प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। कटनी के साहित्यिक इतिहास में भी ऐसा ही एक प्रेरणादायी अध्याय दर्ज है, जब 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौर में नगर के कवियों और शिक्षकों ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया।
देशभक्ति से प्रेरित इन कवियों ने आपसी आर्थिक सहयोग से वर्ष 1963 में 38 कवियों की काव्य रचनाओं का संकलन ‘रणभेरी’ प्रकाशित कराया था। यह कृति उस दौर की राष्ट्रीय भावना और साहित्यिक चेतना की महत्वपूर्ण दस्तावेजी विरासत के रूप में देखी जाती है।
‘रणभेरी’ का पुनर्प्रकाशन, साहित्यिक विरासत को मिला नया जीवन
समय के साथ यह दुर्लभ काव्य कृति अनुपलब्ध हो गई थी। साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में पिछले वर्ष INTACH (Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) कटनी चैप्टर द्वारा ‘रणभेरी’ का पुनर्प्रकाशन कराया गया।
इस पहल को कटनी की साहित्यिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण और सराहनीय प्रयास बताया गया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उन कवियों, शिक्षकों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश और समाज में चेतना जगाने का कार्य किया।
‘रणभेरी’ की समीक्षा के साथ सजी काव्य गोष्ठी
शिकागो पब्लिक स्कूल स्थित अमर शहीद हेमू कालानी स्मृति वाचनालय में INTACH कटनी चैप्टर द्वारा ‘रणभेरी’ काव्य कृति की समीक्षा एवं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राधेश्याम ब्रजपुरिया ने की। विभवराम त्रिपाठी मुख्य अतिथि तथा रामाधार गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज में चेतना, राष्ट्रीय भावना और सकारात्मक दिशा पैदा करने का माध्यम भी है। ‘रणभेरी’ इसी साहित्यिक और राष्ट्रीय चेतना की ऐतिहासिक विरासत को सामने लाती है।
अजय सरावगी का सम्मान, कवियों के परिजनों की रही मौजूदगी
‘रणभेरी’ के पुनर्प्रकाशन के व्यय का दायित्व निभाने वाले समाजसेवी एवं कटनी टेंट लाइट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सरावगी का सम्मान किया गया।
रणभेरी कृति के कवि विभवराम त्रिपाठी तथा अन्य कवियों के परिजनों मनोज सोनी, पी.एस. बैरागी और रानी निगम सहित अन्य लोगों ने शाल एवं श्रीफल भेंट कर उनका सम्मान किया। अजय सरावगी की अनुपस्थिति में यह सम्मान सुश्री भारती नागवानी एवं मुस्कान नागवानी ने ग्रहण किया।
अमर शहीद हेमू कालानी स्मृति वाचनालय की ओर से भी कार्यक्रम के अध्यक्ष और अतिथियों का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया।
नई पीढ़ी तक पहुंचे साहित्य और इतिहास की विरासत
कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र सिंह ठाकुर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन विद्यालय के प्राचार्य आर.एल. निगम ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय के स्टाफ के साथ अनेक छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ऐतिहासिक साहित्यिक कृतियों का संरक्षण केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उस दौर की राष्ट्रीय चेतना और साहित्यिक परंपरा से जोड़ना भी है।
‘रणभेरी’ का पुनर्प्रकाशन इसी दृष्टि से कटनी की साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने की एक उल्लेखनीय पहल के रूप में सामने आया है।
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