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आईएएस की नौकरी से त्यागपत्र देने वाले राजीव शर्मा का भिंड पहुँचने पर जोरदाए स्वागत।

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ग्वालियर/भिंड। शहडोल कमीश्नर के पद पर रहते हुए शासकीय सेवा से त्यागपत्र देने वाले आईएएस राजीव शर्मा पहली बार भिंड आए। भिंड के खंडा रोड पर अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के कई राजनेता समेत गणमान्य जन शामिल हुए है। कयास लगाया जा रहा है कि आईएएस शर्मा किसी राजनीति पार्टी से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतरेंगे लेकिन उन्होंने अपने वक्तव्य में राजनीति न करने और भिंड के विकास का संकल्प लेने की बात कही है।

भिंड जिले के मेहगांव कस्बे के ग्राम गढ़ी के रहने वाले राजीव शर्मा आईएएस की नौकरी से वीआरएस ले ली है। वे समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़कर भिंड की पहचान बदलने की बात कह रहे है। राजीव शर्मा का अभिनंदन कार्यक्रम राजनीति की तर्ज पर भिंड के खंडा रोड किया गया। वे 35 साल से शासकीय सेवा में डिप्टी कलेक्टर से लेकर कमिश्नर पद पर रहे। वे शहडोल कमिश्नर भी रह चुके है। शहडोल कमिश्नर के पद पर रहत हुए ही राजीव शर्मा ने शासकीय सेवा से त्यागपत्र द्व दिया लेकिन जब तक सरकार ने त्यागपत्र मंजूर किया तब तक उनकी पोस्टिंग वल्लभ भवन भोपाल में हो गई। वल्लभ भवन भोपाल में तैनाती के दौरान यहीं से वीआरएस लेकर भिंड पहुंचे हैं।

आईएएस राजीव शर्मा शुक्रवार की शाम को गाड़ियों और समर्थको के काफिले के साथ खंडा रोड पर आयोजित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से मुलाकात की । वे गोल मार्केट से खंडा रोड पर शहरवासियों से राजनेता की तर्ज पर मुलाकात करते हुए कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा आइएएस शर्मा का फूलमाला से स्वागत किया। मंच को संबोधित करते शर्मा ने कहा कि भिंड हमारी मां है। जन्मभूमि है। इस माटी से मेरा ममत्व जुड़ा है। आजादी के इतने साल बाद भी हमारा भिंड पिछड़ा है। बस मेरे जीवन का यह उद्देश्य है कि भिंड से पिछड़ापन दूर करके विकसित शहर बना सकें। इसी विचार के साथ सरकारी सेवा से दूर होकर भिंड की सेवा करने का सकंल्प लिया है। उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में सर्व सुविधाएं है। मेरे एक बटन दवाने पर सर्वसुविधाएं मिलती है परंतु जब मैं भिंड की ओर देखता हूं। यहां के लोगों के जीवन की ओर देखता हूं तो मन व्याकुल हो उठता है। मन में पीड़ा होती है। बस यह कारण है कि मैं फिर से अपनी माटी की ओर लौटा हूं।

जीवन का लक्ष्य राजनीति नहीं, भिंड का विकास है।

आईएएस शर्मा ने कहा कि मेरे नौकरी छोड़ने की चर्चा होने पर कई राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव लड़ने के लिए प्रस्ताव आए। मेरे जीवन का लक्ष्य राजनीति करना नहीं है। मेरा उद्देश्य भिंड को विकसित बनाना है। इसी उद्देश्य से आया हूं। उन्होंने कहा कि मैं कई जिलों में रहा हूं। मालवा का किसान एक लाख से लेकर एक करोड़ तक की फसल बेचता है। क्या कभी भिंड के किसान ने एक करोड़ की एक साल में फसल बेची है। भिंड में संसाधनो की कमी बहुत कमी है। उचित संसाधनों और उन्नत तकनीक से खेती करने से किसान समृध्द होंगे।

उन्होंने बताया कि अपने गौरी किनारा,वनखंडेश्वर मार्ग स्थित पैतृक निवास को छात्रों के हित में निशुल्क वातानुकूलित लाइब्रेरी में परिवर्तित किया इस दौरान 7 दिन भिंड में रहा और भिंड के वर्तमान हालात देखकर यह चिंतन किया कि भिण्ड विकास में पीछे क्यों? इस पीड़ा से द्रवित होकर अब कमिश्नर पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपनी जन्मभूमि को ही कर्मभूमि बनाने का निर्णय किया है, जिससे भिण्ड जिले को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके।

राजीव शर्मा की पारिवारिक प्रष्ठभूमि और संक्षिप्त जीवन परिचय।

आईएएस राजीव शर्मा के बाबा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे तथा आजादी के उपरांत कमुनिस्ट आंदोलन से जुड़ गए, कामरेड बाबा जनकराम अपने निजी प्रयासों से एक संपादक के रूप में अखबार भी निकालते थे। राजीव शर्मा के पिता रामनारायण शर्मा ने भी शासकीय सेवा छोड़कर 1967 में सार्वजनिक विद्यालय की स्थापना की थी। निर्धन और कमजोर वर्ग के सहायता हेतु संचालित मांटेसरी पद्धति का यह विद्यालय अपने आप में बहुत अनूठा था। गुन्दे मास्टर की कोठी में इसी सार्वजनिक मांटेसरी विद्यालय में राजीव की प्रारंभिक शिक्षा शिक्षा दीक्षा हुई थी। गौरी किनारे किरण निवास में जन्मे राजीव बचपन से ही योगाश्रम से जुड़ गए थे जहाँ उन्होंने योग, प्राणायाम, ध्यान सीखा और गौरी सरोवर में तैराकी भी सीखी। 1975 में बाबा और 1977 में पिता की असमय मृत्यु ने परिवार को दुख के भंवर में फँसा दिया। तब चाचा शिवचरण उपाध्याय ने विद्यालय और परिवार की जिम्मेदारी संभाली। काटनजीन स्कूल से कक्षा 8 पास कर राजीव शासकीय बहु.उ.मा. विद्यालय क्रमांक 1 में गए, तथा स्काउट और NCC के अलावा साहित्यक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाषण, वाद विवाद, अभिनय तथा काव्य पाठ में विजेता बने।तत्पश्चात MIS कॉलेज से इतिहास में MA किया, छात्र संघ का चुनाव जीता। दैनिक उदगार, साप्ताहिक वनखडेश्वर, गौरी सरोवर आदि में पत्रकारिता की। 1978 में तरुण कला संगम की स्थापना की। एनएसएस में भिण्ड और मप्र का राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिनिधित्व किया। 21 वर्ष की आयु में प्रथम प्रयास में ही मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा टॉप कर प्रशासनिक सेवा में चले गए। शहडोल संभाग में आदिवासियों के बीच फुटबॉल को घर घर तक पहुंचाया जिसकी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात में कर चुके हैं। डिप्टी कलेक्टर से कमिश्नर पद तक की यात्रा में श्री राजीव शर्मा ने अपनी प्रशासनिक दक्षता के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। मंडला जिले में हर टोला मजरे को मुख्य सड़क से जोड़ने की बात हो या नरसिंहपुर में जलाभिषेक योजना की बात हो, शहडोल में कुओं को रिचार्ज कर भूजल स्तर को ऊपर उठने की बात हो या शाजापुर में संतरा क्रांति करके किसानों को समृद्ध बनाने की बात हो, राजीव शर्मा ने जहां-जहां भी वह पदस्थ रहे हैं वहां उन्होंने अपनी प्रशासनिक दक्षता से आम जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाया है।

आईएएस अधिकारी रहते मिली कई उपलब्धियां।

भारतीय प्रशासनिक सेवा में 35 वर्ष तक सेवाएं देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपनी जन्मभूमि भिंड को विकासपथ पर आगे बढ़ाने का संकल्प लेने वाले राजीव शर्मा ने अपने सेवाकाल में किये गए बेहतरीन कार्यों के लिए कई उपलब्धियां हांसिल की। संक्षेप में राजीव शर्मा की उपलब्धियां निम्नलिखित हैं।

1-Best SDM Award winner

2-Best CEO Zp invited in Mussoorie academy 2006

3-world poverty conference 2008 में इनके काम पर फ़िल्म दिखाई गई।

4- थाई सरकार ने रॉयल फेलोशिप दी 2006- S-USA की साइराक्यूज यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कोर्स 2018

6- दक्षिण कोरिया के KDI से प्रशिक्षित 2016

7- अंतर्राष्ट्रीय वैली ऑफ बुक्स अवार्ड से सम्मानित

8- एक दर्जन से अधिक पुस्तकों के लेखक जिनमें विद्रोही सन्यासी की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही हैं तथा मराठी, बांग्ला, अंग्रेजी एवं उर्दू में अनुवाद

9- फुटबॉल क्रांति, जल क्रांति के जनक

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