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युवाओं के सपनों पर चोट! विदिशा खेल स्टेडियम की जर्जर स्थिति.

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विदिशा खेल स्टेडियम की खस्ता हालत ने एथलीट्स और युवा खिलाड़ियों के सपनों पर पानी फेर दिया। क्या प्रशासन करेगा कोई सुधार?

खराब सुविधाओं के बीच अभ्यास करते युवा खिलाड़ी, विदिशा खेल स्टेडियम

विदिशा खेल स्टेडियम में सुविधाओं की भारी कमी, खिलाड़ियों ने जताई नाराजगी

Blow to Youth’s Dreams! Dilapidated Condition of Vidisha Sports Stadium.

क्या सरकार का खेल बजट सिर्फ कागजों तक सीमित है?

Source : NDTV MPCG Edited by MP Samwad.

मध्य प्रदेश सरकार (MP Government) हर साल खेल विभाग (Sports Department) को लाखों रुपये का बजट देती है, ताकि प्रदेश के युवा खेलों के जरिए अपना भविष्य संवार सकें। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह बजट जमीनी स्तर पर लागू होता है या सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाता है?

इसी सच्चाई की पड़ताल करने के लिए एनडीटीवी की टीम विदिशा (Vidisha) के एकमात्र खेल स्टेडियम पहुंची, जहां युवाओं के सपने और हकीकत के बीच बड़ा फासला नजर आता है।

इसी सच्चाई की पड़ताल करने के लिए एनडीटीवी की टीम विदिशा (Vidisha) के एकमात्र खेल स्टेडियम पहुंची, जहां युवाओं के सपने और हकीकत के बीच बड़ा फासला नजर आता है।


जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर से जूझता विदिशा खेल स्टेडियम

विदिशा का इकलौता खेल स्टेडियम, जो भविष्य के एथलीट और देश के रक्षक तैयार करने का दावा करता है, आज खुद बदहाली की तस्वीर बना हुआ है।

? मुख्य समस्याएं:
टूटी-फूटी सुविधाएं – स्टेडियम में रखरखाव की भारी कमी।
खराब ट्रैक – जहां एथलीट्स को दौड़ना चाहिए, वहां कंकड़-पत्थर बिखरे पड़े हैं।
जर्जर जिम – वर्कआउट के लिए बना जिम महज दिखावे के लिए रह गया है।
बास्केटबॉल कोर्ट की टूटी जालियां – यहां खेल सुविधाओं की असली स्थिति दर्शाती हैं।


विदिशा एसपी ने स्टेडियम का किया निरीक्षण

विदिशा के एसपी रोहित कासवानी जब आम नागरिक की तरह ट्रैकशूट पहनकर स्टेडियम पहुंचे, तो यहां की हालत देखकर हैरान रह गए। खिलाड़ियों के अभ्यास स्थल की दुर्दशा और खेल उपकरणों की कमी पर उन्होंने चिंता जताई।

उन्होंने कहा:
?️ “यहां की स्थिति सुधारने के लिए जल्द कार्रवाई की जाएगी, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।”


खिलाड़ियों की व्यथा: ‘यहां किसी को फर्क नहीं पड़ता’

स्टेडियम में पुलिस और सेना की भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं से जब हमारी टीम ने बात की, तो उनकी निराशा साफ झलक रही थी।

? खिलाड़ियों का दर्द:
? “सर, आप ही देख लीजिए इस ट्रैक की हालत! कभी पैर मुड़ जाता है, तो कभी खून निकल आता है। लेकिन यहां किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।”

क्या सरकार युवाओं को खेल की बेहतर सुविधाएं दे पाएगी? या फिर यह बजट सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा? अपनी राय कमेंट में साझा करें!

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