MP SAMVAAD LOGO 2

खुदाई में मिला अंग्रेजों से लूटा टंट्या मामा का गड़ा हुआ खजाना

0

खंडवा! एमपी के खंडवा जिले में अंग्रेजों के जमाने का खजाना मिला है। यहां के खिडगांव में पुराने मकान के मलबे में सोने चांदी के सिक्के मिले।

स्कूल के बच्चे यहां खेलने आए तो उनकी नजर सिक्कों पर पड़ी। बच्चों को सिक्के मिलने की खबर गांव में फैली तो यहां लोगों की भीड़ लग गई। गांव वालों ने यहां कई गड्ढे खोद डाले और इनमें से कई लोगों को सोने-चांदी के सिक्के मिले। दस दिन पुरानी इस घटना के बारे में अब एक नई बात सामने आई है। अंग्रेजों के इन सिक्कों को यहां के जननायक क्रांतिकारी नेता टंट्या भील का खजाना बताया जा रहा है। क्षेत्र में उन्हें प्यार से टंट्या मामा भी कहा जाता है।

गांव में एक पुराने मकान की जगह नया मकान बनाया जा रहा है। इसके लिए खुदाई की गई और मलबे को पास की नदी के किनारे डाल दिया गया।10 दिसंबर को यहां स्कूल के बच्चे खेलने आए तो उन्हें यहां ब्रिटिश कालीन सिक्के मिले। बच्चों को सोने-चांदी के सिक्के मिलते ही यहां लोगों की भीड़ लग गई और पूरा गांव सिक्कों की खोज में लग गया। बाद में पुलिस ने कुछ लोगों से ये पुराने सिक्के बरामद किए।
अंग्रेजों के इन सिक्कों को अब जानकार लोग टंट्या भील का खजाना बता रहे हैं। इतिहासकारों, विशेषज्ञों के मुताबिक टंट्या भील अंग्रेजों से लूट करते और सारा सामान इलाके में बांट देते थे। उस जमाने में टंट्या द्वारा दिए गए सिक्कों को सुरक्षित रखने के लिए लोग उन्हें जमीन में गड़ा देते थे। गड़ा हुआ यही खजाना खिडगांव में लोगों को मिला है। इससे पहले भी इलाके में कई बार लोगों को जमीन में गड़े सोने चांदी के सिक्कों का खजाना मिल चुका है। खंडवा और पास के जिलों में कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं। तीन साल पहले खंडवा के ही पुनासा में खुदाई में करीब तीन सौ सिक्के मिले थे। सात साल पहले खरगोन के भगवानपुरा में भी सिक्के प्राप्त हुए थे। यहां के टांडा बरुड गांव में भी सोने चांदी के सिक्के खुदाई में मिले थे। इन सभी जगहों पर मिले सिक्कों को जननायक टंट्या भील का अंग्रेजों से लूटा गया खजाना ही कहा गया था।

कौन थे टंट्या भील
टंट्या भील अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करते हुए आदिवासियों के हितों के लिए काम करते थे। वे अंग्रेजों का धन लूटते और उसे गरीबों में बांट देते। लूटे गए सोने चांदी के सिक्कों और जेवरात देकर उन्होंने कई कन्याओं की शादी कराई। उन्होंने सन 1878 में बुरहानपुर का सरकारी खजाना लूटा था। उस जमाने में लोग धन संपत्ति को जमीन में गड़ा देते थे। मालवा निमाड़ इलाके में यही गड़ा हुआ खजाना जब तब खुदाई में मिल जाता है।
1889 में जब टंट्या भील को गिरफ़्तार किया गया तब कई विदेशी अखबारों में भी इसका जिक्र किया गया। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयार्क टाइम्स में टंट्या भील को भारत के राबिन हुड की उपाधि दी गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.