cropped-mp-samwad-1.png

बाघिन लापता, अधिकारी चुप! सोनेवानी रिजर्व में वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल.

0

Tigress Missing, Officials Silent! Questions Raised Over Wildlife Safety in Sonawani Reserve.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां चार शावकों की मां ‘गौरा’ बाघिन पिछले डेढ़ महीने से लापता बताई जा रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता और सवाल दोनों बढ़ गए हैं।

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले पर्यटकों ने गौरा बाघिन को उसके चार शावकों के साथ जंगल में विचरण करते हुए देखा था, जिसकी तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए थे।

मां के बिना भटक रहे शावक, हालत कमजोर

वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार, बाघिन अपने छोटे बच्चों को कभी अकेला नहीं छोड़ती थी। लेकिन उसके अचानक गायब होने के बाद

  • तीन शावक जंगल में भटकते देखे जा रहे हैं
  • उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है

एक शावक के साथ बाघिन के लापता होने की बात भी सामने आ रही है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

मॉनिटरिंग में चूक, लापरवाही पर सवाल

जानकारों का कहना है कि बाघिन और उसके शावकों की नियमित मॉनिटरिंग की जानी चाहिए थी

  • कैमरा ट्रैप लगाकर मूवमेंट ट्रैक करना जरूरी था
  • हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए प्रोटोकॉल तय है

लेकिन इन सब व्यवस्थाओं में लापरवाही बरती गई, जिसके चलते बाघिन और शावकों के गायब होने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई।

वन विभाग की चुप्पी, जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?

मां बाघिन से अलग हुए शावक कब और कैसे बिछड़े, इस सवाल पर वन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे उनकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूचना के बाद हरकत में विभाग

सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद डीएफओ नित्यानंथनम शनिवार को लालबर्रा के नवेगांव क्षेत्र पहुंचे और कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

लेकिन जब इस संबंध में उनसे विस्तृत जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने एसडीओ से संपर्क करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया

  • एसडीओ विनीता ब्रम्हे ने फोन रिसीव नहीं किया
  • वन परिक्षेत्र अधिकारी (लालबर्रा) भलावी मैडम ने भी कॉल का जवाब नहीं दिया

बड़ा सवाल: शावकों को बचाने कौन आएगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

  • कमजोर हो चुके शावकों का तत्काल रेस्क्यू क्यों नहीं किया जा रहा?
  • लापता बाघिन और शावक की तलाश के लिए विशेष अभियान क्यों नहीं चलाया गया?

वन विभाग की इस कथित लापरवाही ने न सिर्फ वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि जमीनी स्तर पर प्रोटोकॉल का पालन कितना कमजोर है।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो शावकों की जान पर संकट और गहरा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.