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स्लीमनाबाद टनल में करोड़ों का खेल — नियम कुचले, ठेकेदार को खुली छूट!

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Crores at stake in the Sleemanabad tunnel — rules trampled, contractor given a free hand!

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, कटनी जिले की स्लीमनाबाद तहसील में चल रहे टनल प्रोजेक्ट ने मध्य प्रदेश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
भारत के शीर्ष ऑडिट संस्थान Comptroller and Auditor General of India (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि Narmada Valley Development Authority (NVDA) के अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर निजी कंपनी Patel Engineering Limited को 39.60 करोड़ रुपये का ऐसा भुगतान कर दिया, जिसका अनुबंध में कोई प्रावधान ही नहीं था।

यह मामला सीधे तौर पर सरकारी खजाने की लूट और सिस्टम के भीतर बैठे जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

39.60 करोड़ का खेल, नियमों को कुचल कर ठेकेदार को फायदा

कटनी जिले की Sleemanabad तहसील में चल रहा यह टनल प्रोजेक्ट, Bargi Diversion Project के तहत बनाया जा रहा है।
करीब 12 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर व्यास की यह सुरंग नर्मदा का पानी सिंचाई और पेयजल के लिए मोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।

लेकिन कैग की रिपोर्ट बताती है कि इस तकनीकी परियोजना की कठिनाइयों को भ्रष्टाचार का बहाना बना दिया गया।

डीपीआर में पहले से दर्ज था पानी का खतरा, फिर भी बनाया गया ‘अप्रत्याशित घटना’ का बहाना

कैग के मुताबिक, परियोजना की डीपीआर और भू-वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में पहले से स्पष्ट था कि सुरंग क्षेत्र में जलस्तर काफी ऊँचा है।
अनुबंध की शर्तों के अनुसार, खुदाई के दौरान निकलने वाले पानी की निकासी (डी-वॉटरिंग) की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की थी और इसके लिए अलग से किसी भुगतान का प्रावधान नहीं था।

इसके बावजूद, जब टनल बोरिंग मशीन से खुदाई शुरू हुई और पानी का दबाव सामने आया, तो इसे अधिकारियों और ठेकेदार ने मिलकर ‘अप्रत्याशित घटना’ घोषित कर दिया।

यहीं से घोटाले की पटकथा शुरू हुई।

NVDA की बैठक में रखी गई अवैध भुगतान की नींव

कैग रिपोर्ट के अनुसार, NVDA की 257वीं बैठक में जबलपुर के चीफ इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर इस भुगतान की मंजूरी दी गई।

  • फरवरी 2023 में, अनुबंध के विपरीत जाकर 20.81 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान को हरी झंडी दी गई।
  • बाद में रनिंग अकाउंट बिल क्रमांक 338 तक पहुँचते-पहुँचते यह राशि बढ़कर सीधे 39.60 करोड़ रुपये हो गई।

कैग ने साफ कहा है कि अनुबंध में यह स्पष्ट लिखा था कि किसी भी ‘अप्रत्याशित घटना’ से होने वाले नुकसान के लिए ठेकेदार को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

फिर भी, “हादसे की आशंका” का डर दिखाकर सरकारी धन ठेकेदार की झोली में डाल दिया गया।

अधिकारियों का बचाव, कैग की सीधी फटकार

जब इस भुगतान पर सवाल उठे तो विभागीय अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि कार्यक्षेत्र (Scope of Work) को बाद में पुनर्गठित किया गया था।

लेकिन कैग ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

ऑडिट में स्पष्ट हुआ कि निविदा शर्तों (NIT) में केवल समय-सीमा बढ़ाने का प्रावधान था, न कि अतिरिक्त भुगतान का।

कैग ने इस पूरे मामले को सीधे तौर पर—

➡️ वित्तीय अनियमितता
➡️ पद के दुरुपयोग
➡️ और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन

की श्रेणी में रखा है।

बड़ा सवाल – क्या 39.60 करोड़ की जवाबदेही तय होगी?

कटनी के स्लीमनाबाद टनल प्रोजेक्ट में सामने आया यह मामला केवल एक ठेकेदार को फायदा पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि किस तरह तकनीकी जोखिमों की आड़ लेकर सरकारी परियोजनाओं में करोड़ों की बंदरबांट की जा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है—

क्या NVDA के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या यह घोटाला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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