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साहब, हमारी सुनो” – पगड़ी उतारकर एसडीएम से गुहार.

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Villagers protesting against Kherva stone mine expansion in Satna, farmer pleads with SDM by removing turban.

Sir, please listen to us – Farmer takes off his turban to plead before the SDM.

Special Correspondent, Satna, MP Samwad.

Villagers of Kherva, Satna raised strong objections against the expansion of Chitrakoot Crushing Corporation mine in a public hearing. They alleged dust pollution, water crisis, and health hazards like TB and asthma. A farmer removed his turban before the SDM, pleading to stop illegal mining and crusher operations.

MP संवाद, सतना। मझगवां तहसील की ग्राम पंचायत भियामाऊ के खेरवा गांव में संचालित मेसर्स चित्रकूट क्रशिंग कार्पोरेशन खेरवा स्टोन माइन के खिलाफ गुरुवार को आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर से गांव का जीवन दूभर हो गया है और अब दूसरी यूनिट की अनुमति मिलने पर हालात और बिगड़ेंगे।


धूल और धमाकों से तबाह फसलें व स्वास्थ्य

ग्रामीणों ने सुनवाई में बताया कि मौजूदा क्रेशर से उठने वाला धूल का गुबार पूरे गांव को ढंक लेता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण दमा, श्वास रोग और टीबी जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। वहीं, ब्लास्टिंग के दौरान खेतों और मकानों में बड़े पत्थर गिरने से लोगों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता है।
किसानों ने कहा कि धूल की वजह से फसलें बर्बाद हो रही हैं और उत्पादन लगभग शून्य हो चुका है।


पानी के संकट से बेहाल ग्रामीण

ग्रामीणों ने सबसे बड़ी चिंता पानी को लेकर जताई। उनका कहना है कि खनन कार्य से जलस्रोत सूख रहे हैं। कुएं, बावड़ी और नल-पनघट सूख गए हैं, जिसके चलते ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। कंपनी ने 5.164 हैक्टेयर भूमि पर प्रति वर्ष 2.5 लाख क्यूविक मीटर खनन की अनुमति मांगी है, जिसे ग्रामीण जीवन के लिए घातक बताया गया।


जनसुनवाई में किसानों का आक्रोश

करीब 200 किसान जनसुनवाई में पहुंचे और विरोध दर्ज कराया। इसी दौरान एक किसान ने अपनी पगड़ी उतारकर एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर के सामने रखते हुए गुहार लगाई – “साहब, कोई हमारी सुनता नहीं, अवैध क्रेशर को बंद कराइए और नई स्वीकृति न दें।”
एसडीएम ने पटवारी से खनन और क्रशर के दस्तावेज पेश करने को कहा और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पर्यावरण और जनहित को देखते हुए ही निर्णय होगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना को मंजूरी मिली, तो उनका जीवन पूरी तरह संकट में पड़ जाएगा।

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