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इलाज नहीं, सिर्फ रेफर की पर्ची! साईखेड़ा CHC की बदहाल तस्वीर.

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No treatment, only referral slips — a grim picture of Saikheda CHC.

Special Correspondent, Ranjeet Singh Tomar, Narsinghpur MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, साईखेड़ा। लगभग 50 से 60 गांवों की आबादी की जीवनरेखा माने जाने वाला स्वामी विवेकानंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साईखेड़ा आज खुद गंभीर बीमारी से जूझ रहा है — और वह बीमारी है सरकारी लापरवाही

जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती अनिवार्य है, वहां एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं है। आयुष चिकित्सक का पद भी वर्षों से खाली पड़ा है। इलाज के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।

हकीकत यह है कि यहां आने वाला हर दूसरा मरीज बिना इलाज के रेफर कर दिया जाता है।

आठ स्टाफ नर्सों की जगह सिर्फ तीन नर्स,
दो लैब टेक्नीशियन की जगह एक,
दो फार्मासिस्ट की जगह एक,
चार वार्ड बॉय की जगह केवल दो कर्मचारी —
यही है साईखेड़ा स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्ची तस्वीर।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रतिदिन 150 से 200 मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, तो बिना डॉक्टर, बिना स्टाफ और बिना संसाधन यह अस्पताल आखिर चल कैसे रहा है?

आपात स्थिति में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। दुर्घटना के मरीजों को सीधे गाडरवारा या नरसिंहपुर रेफर कर दिया जाता है। पोस्टमार्टम जैसे मामलों में भी यहां कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।

विडंबना देखिए —
जनता के पैसों से दी गई एंबुलेंस अस्पताल परिसर में खड़ी-खड़ी जंग खा रही है, क्योंकि उसे चलाने के लिए आज तक चालक की नियुक्ति ही नहीं की गई।
आपातकाल में मरीजों को प्राइवेट वाहनों या एंबुलेंस किराये पर लेकर ले जाना पड़ता है।

बरसात और मौसम परिवर्तन के साथ ही डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार और सर्दी-खांसी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन के स्तर पर व्यवस्थाएं सुधारने की कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही।

सबसे बड़ा सवाल यही है —

क्या साईखेड़ा और आसपास के 50 से अधिक गांवों की जनता इलाज के अधिकार की हकदार नहीं है?
क्या यह अस्पताल केवल भवन बनकर रह गया है?

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि शीघ्र डॉक्टरों, नर्सों और एंबुलेंस चालक की नियुक्ति नहीं हुई, तो यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कागजों में ही चलता रह जाएगा — जमीन पर नहीं।

अब जरूरत सिर्फ आश्वासन नहीं,
बल्कि तुरंत और ठोस कार्रवाई की है।

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