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साहस, स्वाभिमान और नारीशक्ति की प्रतीक: रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि.

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Rani Durgavati Tribute mpsamwad.com

Symbol of Courage, Pride, and Womanhood: A Tribute to Rani Durgavati.

Rakesh Bramhe, Special Correspondent, Seoni, MP Samwad.

The 461st Rani Durgavati Martyrdom Day was celebrated in Dewas with dignity. Cultural performances, tributes, and speeches honored her legacy of courage, pride, and womanhood. Chief Guest Vikrant Singh Kumre emphasized the importance of recognizing the tribal community’s heroic history and empowering women through inspiration from Rani Durgavati’s life.

MP संवाद, सिवनी। गोंड समाज महासभा, शहर इकाई देवास द्वारा 461वां वीरांगना महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस श्रम कल्याण केंद्र, बीएनपी परिसर में बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम स्थल ‘रानी दुर्गावती अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा।

मुख्य अतिथि विक्रांत सिंह कुमरे (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट), सदस्य कार्य परिषद् बरकतुल्ला विश्वविद्यालय भोपाल एवं पूर्व कानूनी सलाहकार, जनजाति प्रकोष्ठ, राजभवन भोपाल, ने वीरांगना रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। इसके बाद बड़े देव की पूजा-अर्चना और आरती कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत बड़े देव की स्तुति से हुई, जिसमें जिया, जीवा और भव्या ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां दीं।
मुख्य अतिथि श्री कुमरे ने अपने संबोधन में कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन साहस, स्वाभिमान और नारीशक्ति का प्रतीक है। उन्होंने 14 वर्षों तक स्वतंत्र शासन किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।

श्री कुमरे ने यह भी कहा कि इतिहास में जनजातीय नायकों को वह स्थान नहीं मिला जिसके वे पात्र थे। आज यह हमारा दायित्व है कि हम उनके बलिदान को याद रखें और गर्व से साझा करें। उन्होंने महिलाओं को रानी दुर्गावती से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि वे समाज, राजनीति और अर्थव्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाएं।

गोंड समाज जिलाध्यक्ष रामदेव सरलाम ने रानी के शासनकाल का विस्तृत विवरण दिया और बताया कि उनका राज्य जबलपुर, नरसिंहपुर, दमोह, मंडला, छिंदवाड़ा और छत्तीसगढ़ के कुछ भागों तक फैला था। उन्होंने रानी के अंतिम युद्ध का उल्लेख करते हुए बताया कि जब वे घायल होकर चारों ओर से घिर गई थीं, तब उन्होंने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए वीरगति प्राप्त की।

डॉ. सतीश उईके ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रानी दुर्गावती के बलिदान को नमन किया।मुख्य अतिथि श्री कुमरे एवं श्री सरलाम ने चित्रकला और शैक्षणिक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया।कनक मर्सकोले ने गोंडी भाषा में रानी के जीवन पर प्रकाश डाला, वहीं अनुष्का कवड़ेती ने उनके शासन और जीवन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।कार्यक्रम में रिंकू सरियाम, ईशा ठाकुर, ममता कवड़ेती, ममता इवने, नम्रता मरावी, मालती आहके, मनोरमा परते, माधुरी भलावी, पूनम मर्सकोले का विशेष योगदान रहा।राकेश कुमरे ने मंच संचालन किया और आभार दियाल सिंह उईके ने व्यक्त किया।अध्यक्ष डी.एस. उईके और डॉ. सतीश उईके के मार्गदर्शन में ललित आहके, स्वतंत्र ठाकुर, सुनील इवने, कपिल परते, विनोद सरियाम, महेश टेकाम, अजब सिंह कुमरे, सुरेश कवडेती सहित अनेक लोगों ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

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