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गरीबों का चावल, किसका कारोबार? 242 क्विंटल की खेप ने बढ़ाए करोड़ों के सवाल.

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Poor People’s Rice, Whose Business? A 242-Quintal Consignment Raises Questions Worth Millions.

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। सीएमआर चावल की एक संदिग्ध खेप पकड़े जाने के बाद पूरे मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल में 242 क्विंटल से अधिक चावल मिलने के बाद एथेनॉल प्लांट, आवंटन प्रक्रिया और परिवहन व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, जिस चावल को एथेनॉल प्लांट तक पहुंचाया जाना था, वह अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय राइस मिल में पाया गया। इस घटनाक्रम के बाद जांच एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू कर दी है।

प्लांट के नाम पर उठाव, रास्ते में बदला गंतव्य?

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पकड़ी गई खेप उन चावलों में शामिल थी जिनका आवंटन एथेनॉल प्लांट के लिए किया गया था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चावल अपने निर्धारित स्थान तक क्यों नहीं पहुंचा और बीच रास्ते में उसका गंतव्य कैसे बदल गया।

खाने योग्य चावल के आवंटन पर उठे सवाल

सूत्रों का दावा है कि संबंधित चावल गुणवत्ता की दृष्टि से उपयोग योग्य था। ऐसे में यह भी जांच का विषय बन गया है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए किस श्रेणी का चावल जारी किया जाना चाहिए था और वास्तविक आवंटन प्रक्रिया में किन नियमों का पालन किया गया।

हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

दो ट्रकों का रहस्य भी जांच के घेरे में

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संबंधित खेप से जुड़े अन्य वाहनों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। परिवहन दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड और मूवमेंट रजिस्टर का मिलान किया जा रहा है, ताकि पूरी आपूर्ति श्रृंखला की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

भोपाल स्तर तक पहुंची जांच की आंच?

सूत्रों का कहना है कि चावल आवंटन से जुड़े आदेश उच्च स्तर से जारी किए गए थे। इसी कारण जांच एजेंसियां अब आवंटन, परिवहन और उपयोग की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रही हैं।

यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी स्तर पर प्रक्रियात्मक चूक या नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।

राइस मिल और एथेनॉल प्लांट कनेक्शन की पड़ताल

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि एफसीआई से निकला चावल अंतिम रूप से कहां पहुंचा और उसका वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया। इसके लिए रिलीज ऑर्डर, परिवहन रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टरों की गहन जांच की जा रही है।

242 क्विंटल नहीं, पूरे रिकॉर्ड पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि मामला केवल एक खेप तक सीमित नहीं है। यदि पिछले आवंटनों और संबंधित दस्तावेजों की व्यापक जांच की जाती है, तो पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चावल अपने निर्धारित गंतव्य तक क्यों नहीं पहुंचा और इस पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का है या किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका भी सामने आती है।

3 जून की कार्रवाई से मचा हड़कंप

उल्लेखनीय है कि 3 जून को एफसीआई गोदाम नवेगांव से एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना की गई चावल की खेप वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल में पकड़ी गई थी। कार्रवाई के दौरान 490 बोरियों में भरा 242 क्विंटल से अधिक चावल जब्त किया गया, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।

अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला केवल अनियमितता का था या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका भी मौजूद थी।

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