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पेपर लीक ने तोड़ा भरोसा, अब भरोसे की अपील क्यों? उमंग सिंघार का वार

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Paper Leaks Shattered Trust—So Why Appeal for Trust Now? Umang Singhar’s Sharp Attack.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भोपाल दौरे के दौरान दिए गए बयान पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री छात्रों से NEET परीक्षा को लेकर भरोसा रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन देश का युवा पहले ही परीक्षा प्रणाली पर भरोसा करके मेहनत और अपने भविष्य के सपने दांव पर लगा चुका है।

“युवाओं का भरोसा पहले ही टूट चुका है”

उमंग सिंघार ने कहा कि देशभर में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों ने लाखों युवाओं का विश्वास कमजोर किया है। उनका आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था की विफलताओं के कारण छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो उनके सपने और विश्वास दोनों प्रभावित होते हैं।

मऊगंज की आकांक्षा का किया जिक्र

नेता प्रतिपक्ष ने मऊगंज की छात्रा आकांक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों और कथित अविश्वास के माहौल ने कई परिवारों को मानसिक पीड़ा दी है।

उन्होंने कहा कि भोपाल में भरोसे की बात करने से पहले शिक्षा मंत्री को उन परिवारों के दर्द को भी समझना चाहिए, जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर गहरी निराशा का सामना किया है।

“सिर्फ दोबारा परीक्षा नहीं, जवाबदेही भी जरूरी”

उमंग सिंघार ने कहा कि केवल पुनर्परीक्षा आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।

राजनीतिक बयान से आगे बढ़कर व्यवस्था पर बहस

NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर देशभर में समय-समय पर बहस होती रही है। ऐसे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री और विपक्ष के बीच यह बयानबाजी एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और जवाबदेही के मुद्दे को केंद्र में ले आई है।

अब सवाल यह है कि युवाओं का भरोसा मजबूत करने के लिए केवल आश्वासन पर्याप्त होगा या फिर व्यवस्था में ठोस सुधार भी देखने को मिलेंगे।

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