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सांसद विवेक तन्खा ने कहा, देश में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है, यह तानाशाही है, मैं ऐसे प्रजातंत्र में नहीं रहना चाहता

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MP Vivek Tankha said, human rights are being violated in the country, this is a dictatorship, I do not want to live in such a democracy.

भोपाल। कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि देश में मानवीय अधिकारों का हनन हो रहा है। यह तानाशाही है। मैं ऐसे प्रजातंत्र में नहीं रहना चाहता। उन्होंने कहा कि संवैधानिक न्याय को लेकर मैं खुद पीड़ित हूं। संसद में जिस प्रकार से कानून बना रहे हैं, वह प्रजातांत्रिक नहीं है। छोटी-छोटी बातों को लेकर (संभवत: राज्यसभा के सभापति) खफा हो जाते हैं। संसद नियम से नहीं चलता है। यह बात वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर भी कहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जगह नहीं दिया जाता है, न हीं बोलने का मौका दिया जाता है, न ही विरोध करने का मौका दिया जाता है।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आज मंगलवार को राज्यसभा सांसद समेत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत अन्य नेताओं ने एक साथ प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान सांसद तन्खा ने भी यह बातें कही। उन्होंने कहा कि 100 दिन सदन चलाने का नियम है, लेकिन विपक्ष को मौका रखने का नहीं ही मिलता। विपक्ष के बोलने पर सांसदों को निलंबित किया जाता है। वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया को पत्र लिखा था। उसके सुझाव कांग्रेस पार्टी ने अपने न्याय पत्र में रखे हैं। हफ्ते में एक दिन विपक्ष को बोलने का मौका लोकसभा या सदन में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की बात कि जाए तो 3 करोड़ केस पेंडिंग हैं। गरीबों को न्याय नहीं मिल पाता जजों की कमी है। भाजपा इसलिए खुश है कि न्यायपालिका में न्याय की जगह बेल ना मिले। स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट में बेल के केस जाने लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह को बेल दी थी अब अरविंद केजरीवाल भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। सांसद तन्खा ने कहा कि देश में ऐसे लोगों को जज बनना चाहिए, जो निष्पक्ष होना चाहिए। ईमानदार और निष्पक्ष जज का नाम भेज दो तो उसका नाम रोक दिया जाता है। इनकम टैक्स, ईडी, सीबीआई के लाॅ में संशोधन करने की जरूरत है। कांग्रेस के साथ भी यही हुआ। कांग्रेस पार्टी को अपील के लिए जाने पर पूरा पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है, जबकि 20 से 30 % जमा कर खाते को फ्रिज से हटाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद इनकम टैक्स 3,560 करोड़ के टैक्स के मामले को रिलैक्सेशन देती है। उन्होनंे कहा कि टैक्स भरने के लिए एनजीओ और अन्य लोगों को समय दिया, लेकिन कांग्रेस को समय नहीं दिया गया। जबकि 31 मार्च तक रिटर्न भरने का समय था। तन्खा ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों को डरा धमका की कॉलर पकड़ के बाहर निकाला जा रहा हैं। लोकतात्रिक संस्थान को बचाने के लिए संस्थाओं को भी क्योर करना पड़ेगा।

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