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MP शिक्षा विभाग का अजब खेल! आवेदन कम, तबादले ज्यादा.

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Teachers Transfer Scam in MP Education Department exposed in Assembly session

Strange Game of the Education Department! Fewer Applications, More Transfers.

Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.

Madhya Pradesh, the School Education Department transferred over 11,500 teachers, despite receiving only 4,503 applications through the new Education Portal 3.0. This shocking data, revealed in the Assembly, has exposed massive discrepancies and raised serious concerns about transparency and the actual purpose of this expensive system.

MP संवाद, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र जारी है। इस बीच, स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सदन में सामने आया है, जिससे स्थानांतरण नीति और शिक्षा पोर्टल 3.0 की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

दरअसल, शिक्षकों के ट्रांसफर के लिए जितने आवेदन आए, उससे ढाई गुना अधिक तबादले कर दिए गए। जब राघौगढ़ से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सदन में यह मुद्दा उठाया, तो शिक्षा विभाग की बड़ी चूक उजागर हुई।


क्या है मामला?

हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल 3.0 लॉन्च किया और शिक्षकों से स्थानांतरण के लिए आवेदन मांगे। इस पोर्टल पर 4,503 आवेदन आए। लेकिन विभाग ने 11,584 शिक्षकों के तबादले कर दिए, यानी आवेदनों की तुलना में लगभग ढाई गुना ज्यादा ट्रांसफर किए गए।

जब विधायक जयवर्धन सिंह ने इस पर सवाल उठाया, तो शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने जवाब में आंकड़े रखे और पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ियों को जिम्मेदार बताया।


5.70 करोड़ का पोर्टल, फिर भी गड़बड़ी!

शिक्षा मंत्री ने बताया कि पोर्टल बनाने का कार्य 9 सितंबर 2024 को केंद्र सरकार की संस्था NIXI को सौंपा गया था, जिसकी लागत 5 करोड़ 70 लाख 80 हजार 250 रुपये है। पांच वर्षों की अवधि के लिए तैयार इस पोर्टल को जिला, संकुल, स्कूल और राज्य स्तर पर लॉगिन एक्सेस प्रदान किया गया है।

सरकार की सफाई और विपक्ष का हमला

मंत्री ने सफाई दी कि ट्रांसफर नीति नियमों के अनुसार है और भाजपा सरकार पारदर्शिता के दायरे में काम करती है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के समय में तो केवल ‘कलम’ के बल पर ट्रांसफर होते थे।”

लेकिन कांग्रेस ने इस जवाब को नाकाफी बताते हुए कहा कि जब पोर्टल सही काम ही नहीं कर रहा, तो स्थानांतरण कैसे कर दिए गए? और आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च कर भी पारदर्शिता क्यों नहीं दिखी?


यह मामला सिर्फ ट्रांसफर नीति का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की जवाबदेही और तकनीकी व्यवस्थाओं की पारदर्शिता का भी है। सवाल यह है कि क्या इतने महंगे पोर्टल और नीति के बावजूद भी शिक्षकों के तबादलों में राजनीति और मनमानी चलती रहेगी?

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